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Saturday, 4 January 2020

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गर्म चाय पीना कहीं आपके सेहत को पहुंचाता है नुकसान, पढ़े पूरी खबर

आर.पी.पी न्यूज़:(हेल्थ डेस्क) चाय एक ऐसा पेय, जो हम हिंदुस्तानियों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गया है। अधिकतर लोगों के लिए हर दिन की शुरुआत सुबह की चाय के साथ होती है। अगर आप भी चाय पीने के शौकीन हैं तो हाल ही में हुए शोध पर आधारित यह खबर आपके लिए है। नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों का दिमाग चाय नहीं पीने वाले लोगों की अपेक्षा ज्यादा तंदुरुस्त रहता है। ये तो हो गई फायदे की बात, लेकिन अक्सर गर्म चाय पीना हमारी सेहत को भारी नुकसान भी पहुंचा सकता है। आइए, जानते हैं चाय पीने को लेकर हुआ हालिया शोध क्या कहता है:
सिंगापुर में हुए एक शोध में ऐसा दावा किया गया है कि नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों का दिमाग, चाय नहीं पीने वाले लोगों की तुलना में ज्यादा तेज काम करता है। पूर्व में भी हुए कई शोधों में ये बात प्रमाणित हो चुकी है। दरअसल, दिमाग के प्रत्येक हिस्से का व्यवस्थित रहना स्वस्थ संज्ञानात्मक क्रिया यानी कि दिमाग की प्रतिक्रिया से जुड़ा हुआ है।
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के असिस्टेंट प्रोफेसर फेंग लेई की अगुवाई में शोधार्थियों ने इन परिणामों तक पहुंचने के लिए 36 उम्रदराज लोगों के न्यूरोइमेजिंग डाटा को खंगाला। यह अध्ययन 2015 से लेकर 2018 के बीच 60 साल और उससे अधिक उम्र वाले 36 बुजुर्गों पर किया गया जिसमें उनकी सेहत संबंधी डाटा जुटाया गया।

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Saturday, 19 October 2019

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वैज्ञानिक भी मानतें हैं अपने दादा-दादी के साथ खुश रहतें हैं बच्चे


आर.पी.पी न्यूज़:(हेल्थ डेस्क) बचपन मे अपने दादा-दादी के साथ गुजारे हुए पल, हमारी जिंदगी के सबसे यादगार पलों में से एक होते है। दादा-दादी या नाना-नानी का होना बच्चे के बचपन को सुखद बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे बच्चे, जो अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रहते हैं, उनमें एक अलग तरीके की समझ और एक खास किस्म की संवेदनाएं होती हैं। ऐसे बच्चे हमशा खुश, मिलनसार और चीजों को बांटकर इस्तेमाल करने वाले होते हैं। इनमें परिवार में रहने और सभी की भावनाओं की कद्र करने की खास कला होती है। पर आज जिस तरह शहर बढ़ रहा है और हमारे कमरे छोटे पड़ रहे हैं, लोग अकेले हो रहे हैं। सब अपनी एक छोटी सी फैमिली में रहते हैं, जिनमें दादा-दादी या नाना-नानी मेहमान बन कर रह जाते हैं। पर आपको पता है कि सांइस के अनुसार-आपको अपने बच्चों को अपने मां-बाप के साथ ही रखना चाहिए। साइंस की मानें, तो जो बच्चे अपने दादा-दादी या नाना- नानी के साथ रहते हैं, वो बाकी अकेले रहने वाले बच्चों से काफी अलग होते हैं। आज हम आपको ऐसे 5 कारण बताएंगे कि आखिरकार क्यों जरूरी है बच्चों का अपने गैन-पैरेंट्स के साथ रहना। बच्चे अपनी जड़ो के बारे में जानकर सीखते हैं कई गुण
जब बच्चे अपने परिवार के इतिहास के बारे में बहुत कुछ जानते हैं और अपने दादा दादी की भावनात्मक बातें समझा करते हैं, तो इस तरह बच्चों में किसी से भी जुड़ाव रखने की भावना को प्रबलता मिलती है। बच्चे न सिर्फ दादा-दादी के और करीब आ जाते हैं, बल्कि उनमें स्नेह, आदर और सेवा जैसे मानवीय गुण विकसित होते हैं। जिससे, बच्चे काफी लचीले और परिस्थिति अनुसार रहना सीख जाते हैं। साथ ही ऐसे बच्चों का दिमाग तेज भी होता है। वे दूसरों की तुलना में अधिक स्मार्ट और परिपक्व दिखाई देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब वे अपने परिवार के इतिहास और कठिनाई के बारे में जानते हैं, तो वे उससे सीखते हैं कि कैसे मुश्किलों में भी आगे बढ़कर, अपनी लड़ाई लड़ी जाती है।भावनात्मक तरीके से बनते हैं मजबूत...
जब बच्चे अपने दादा-दादी के साथ बहुत समय बिताते हैं, तो उनके पास किसी भी भावनात्मक या व्यवहार संबंधी परेशानियों से निपटने के लिए बेहतर समझ पैदा हो जाती है। आगे चलकर बड़े होने पर यही चीजें उन्हें किसी भी तरह के आघात का सामना करने में सक्षम बनाते हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि दादा-दादी के संपर्क में रहने वाले बच्चे अकेलेपन, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से कम पीड़ित होते हैं। वह हर तरीके से रहना सीख लेते हैं। उन्हें हर मुश्किल का हल निकालना आ जाता है। सीखते हैं नैतिक गुण
मुख्य रूप से, माता-पिता का काम है कि वे अपने बच्चों में अच्छे संस्कार और नैतिकता पैदा करें। उन्हें सहानुभूति और दया सिखाएँ लेकिन दादा-दादी इस मामले में एक बड़ी मदद कर सकते हैं। दादा-दादी या नाना-नानी विश्वास, प्रेम और शुरुआती शिक्षा के स्तंभ के रूप में कार्य करते हुए। वे बच्चों को अच्छी कहानियां सुनाकर ही सिखा लेते हैं कि जीवन में कुछ चीजें क्यों जरूरी है। दादी-नानी की कहानियां बच्चों को ज्ञान देते हैं। ऐसे इन बच्चों के जीवन पर इन नैतिक कहानियों का अच्छा प्रभाव पडता है। आपका बच्चा अपने दादा-दादी से थोड़ी सी सीख, संस्कार और नैतिकता सीखकर एक सुंदर, समझदार और सम्मानित व्यक्ति के रूप में विकसित हो सकता है।

आपके मां-बाप भी रहेंगे खुश और सेहतमंद...
गैन-पैरेंट्स का आपके बच्चों के साथ रहना न सिर्फ आपके बच्चे को खुश और स्वस्थ रखता है, ब्लकि यह आपके बूढ़े मां-बाप के लिए भी अच्छा है। आपके बच्चों के साथ रहकर आपके मां-बाप खुश रहते हैं। वह कभी अकेला महसूस नहीं करते और ना ही उन्हें खालीपन का अहसास होता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ माता-पिता डिप्रेशन और भूलने की बामारी आदि के शिकार हो जाते हैं। गौर करने की बात यह है कि यह सारी बीमारियां अकेलेपन और खाली होने से होती है। ऐसे में आपके बच्चों के साथ रहकर आपके मां-बाप खुश और स्वस्थ रह सकते हैं। 
अपने माँ-बाप को बोझ ना समझें, माँ-बाप की दुआओं में बड़ा असर होता है,  सिर्फ हम ही नही हमारी संताने भी माँ-बाप के रहने से खुश होतीं हैं। हमें विश्वास हैं कि आपको यह ख़बर जरूर अच्छी लगी होगी। अगर आप हर सोमवार ऐसी ही रोचक जानकारी प्राप्त करना चाहतें हैं तो देखें आर.पी.पी न्यूज़ या हमारी वेबसाइट www.rppnewsportal.com  पर आकर हेल्थ टैग देखें, या इस लिंक पर क्लिक कर व्हाट्सएप ग्रुप जॉइन करें https://chat.whatsapp.com/ATbLPGRwQXFEhxOPfi9GgG
राजन पटेल की रिपोर्ट, आर.पी.पी न्यूज़ के लिए
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Monday, 7 October 2019

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बदलते मौसम में रखे ख्याल ,करे घरेलु उपाय

बदलते मौसम में लोगो का तबियत ख़राब होना आम बात है , इस समय मौसम में बदलाव के कारण हमार शारीर उस मौसम के अनुसार  ढल में समय लगता है इस वजह से लोगो की तबियत ख़राब होती है साथ ही इस समय वातावरण में प्रदुषण होने का सभावना ज्यादा होता है |



आर पी पी न्यूज़ :- डिजिटल डेस्क - प्रदूषण बढ़ने के साथ ही श्वासन तंत्र में गड़बड़ी होने लग जाती है। तापमान में अचानक बदलाव, मौसम में खुश्की के अलावा प्रदूषण के छोटे-छोटे कण हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और ये श्वांस नली से लेकर फेफड़ों तक में जम जाते हैं। इससे सर्दी-जुकाम, खांसी आदि समस्याएं होती हैं। आगे जाकर ये ब्रॉन्काइटिस, अस्थमा, सीओपीडी जैसी समस्याओं में भी बदल सकती हैं। इन सबसे बचने के लिए आयुर्वेद के साथ-साथ घरेलू नुस्खे भी काफी कारगर हैं। बढ़ते प्रदूषण से लोग परेशान हैं। खासकर रोज ट्रैवल करने वाले कामकाजी लोगों को पलूशन से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कैसे हम अपनी इम्युनिटी को बढ़ाकर प्रदूषण के असर को कम कर सकते हैं, बता रहे हैं आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ. आर. पी. पाराशर

शरीर में जब सर्दी-जुकाम के रूप में प्रदूषण के प्रति प्रतिक्रिया दिखने लगे तो 2 गिलास गर्म पानी पीकर मुंह ढककर मोटा कपड़ा ओढ़ लें और 20 मिनट पसीना आने दें। बलगम आसानी से बाहर निकल जाएगा। ऐसा 2 बार कर सकते हैं, लेकिन रात में जरूर करें ताकि दिन भर के प्रदूषण का असर कम किया जा सके।

• हल्दी को पानी में उबालकर उससे गरारे करें। हल्दी के पानी को पी भी सकते हैं।
• नमक के गरारे करें या पानी में मिलाकर पिएं।
• कमर और छाती पर देसी घी में थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर मालिश करें। सैंधवादि तेल से भी मालिश कर सकते हैं। इससे अंदर जमा बलगम बाहर निकलेगा। दिन में 3-4 बार मालिश करनी चाहिए।
• आयुर्वेद में सर्दी-जुकाम, इन्फेक्शन आदि के लिए तालीशादि चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण, अभ्रक भस्म, चंद्रअमृत रस, लक्ष्मीविलास रस, वासाअवलेह, कनकासव, श्वासकुठा रस आदि दवाएं दी जाती हैं। श्वासकुठा रस अस्थमा में खासा असरदार है, लेकिन कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।

• सौंठ, काली मिर्च, छोटी पिपली को एक साथ मिलाकर या अलग-अलग भी ले सकते हैं। 2-3 काली मिर्च, 5-7 पिपली, आधा इंची सौंठ को पानी में उबालकर या पीसकर सेवन करें। इन्हें आयुर्वेद में त्रिकटु के नाम से जाना जाता है। ये शरीर में गहरे तक जाकर प्रदूषण के कण बाहर निकाल देते हैं।
• रोजाना थोड़ा-सा गुड़ (करीब 5 ग्राम) खाएं। इससे फेफड़े साफ होते हैं और धमनियां भी साफ होती हैं। चाय में गुड़ डालकर भी ले सकते हैं। रात में सोने से पहले भी गर्म दूध के साथ गुड़ ले सकते हैं। गुड़ को यों ही या फिर तिल के लड्डू बनाकर खा सकते हैं।

• पिसी काली मिर्च को शहद के साथ लेने से सीने में जमा कफ दूर होता है।
• नाक को साफ रखने के लिए गाय के शुद्ध घी की एक-एक बूंद सुबह और शाम नाक में डालें। इससे हानिकारक तत्व फेफड़ों तक नहीं पहुंचते।
• खट्टे फल खाएं, लेकिन सर्दियों में इन्हें धूप में रखकर या थोड़ी देर माइक्रोवेव में रखकर गर्म कर लें। हल्का गर्म होने पर खाएं तो नुकसान नहीं होगा।
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Friday, 2 August 2019

RPP NEWS

मॉनसून में जरा सी लापरवाही बना सकती है बीमार


मॉनसून में जरा सी लापरवाही बना सकती है बीमार

बारिश को देखना और उसमें भीगना हर किसी को अच्छा लगता है। लेकिन दिक्कत तब आती है, जब थोड़ी सी लापरवाही आपको बीमार बना देती है। इसलिए जरूरी है कि मॉनसून में होने वाली दिक्कतों और बीमारियों से दूर रहने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरती जाएं। बारिश में हाइजीन यानी सफाई का विशेष ध्यान रखें। इन टिप्स को करें फॉलो...


हाथों की सफाई

जितनी भी प्रॉब्लम्स स्टार्ट होती हैं, वो हाथों की गंदगी से होती है। इसलिए कुछ भी खाने से पहले हाथ धो लें। बिना हाथ धोए कोई भी चीज टच न करें। यहां तक कि बाल व अपनी स्किन को भी नहीं। अगर नाखून बढ़ाने के शौकीन हैं, तो बारिश के मौसम में इन्हें छोटा ही रखें।


गीले कपड़े तुरंत उतारें


अगर आप बारिश में भींग गए हैं, तो जितनी जल्दी संभव हो, ड्राई व क्लीन कपड़े पहन लें। खासतौर पर गीले अंडरगार्मेंट्स पहनकर रखने से फंगल इन्फेक्शन का खतरा रहता है। लिहाजा बारिश के मौसम में जूते, मोजे व इनरवेयर को हमेशा सूखा रखें।

पैरों की क्लीनिंग

बारिश के मौसम में पैर सबसे ज्यादा पानी से भीगते हैं, इसलिए फंगल इन्फेक्शन का चांस अधिक रहता है। इसलिए...
-पैरों की सफाई के लिए ऐंटिसेप्टिक का इस्तेमाल करें।
- नॉयलान की जगह कॉटन के मोजे पहनें।
- गीले हो गए मोजे को तुरंत बदलें।
- पैरों को डीप क्लीन करने के लिए समय-समय पर पेडिक्योर करवाएं।
- नंगे पांव बिल्कुल न चलें
- खुले जूते पहनें या ऐसी चप्पलें पहनें, जो आसानी से सूख जाएं।
- हफ्ते में एक दिन जूतों को कुछ देर धूप में रखें, जिससे उसमें मौजूद बैक्टीरिया खत्म हो जाए।


स्किन और बालों का रखें ध्यान



बारिश के मौसम में स्किन को हेल्दी रखने के लिए दिन में दो बार साबुन लगाकर नहाएं। एक-दूसरे के तौलिए और कपड़ों का प्रयोग न करें। स्किन पर पसीना न ठहरने दें। इसे किसी साफ कपड़े से पोंछते रहें। नहीं तो फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए डियोड्रेंट या पाउडर यूज करें। बारिश के मौसम में बाल भी ज्यादा गिरते हैं इसलिए माइल्ड शैंपू यूज करें। अगर बालों में डैंड्रफ है, तो ऐंटी डैंड्रफ शैंपू यूज करें लेकिन वीक में केवल एक बार। बालों की टोन को देखते हुए कोई अच्छा नैचरल कंडिशनर लगाना न भूलें।

घर को रखें क्लीन



घर के आसपास पानी न जमा होने दें। इससे मच्छर व दूसरे कीटाणु पैदा नहीं होंगे। घर को नमी से बचाने के लिए जहां लीकेज हो रहा हो, तो उसे तुरंत ठीक करवा लें। कई बार दीवारों में नमी होने से भी घर में कीड़े हो जाते हैं। घर के हर एंट्रेस गेट पर फ्लोर मैट लगाएं। इससे कीचड़ घर के अंदर नहीं आएगा। मॉनसून में किचन को स्मेल से बचाने के लिए रोजाना स्प्रे करें। किचन में चीटियां न आए, इसके लिए सिरके से दो से तीन बार वाइप करें। रात को पेस्टिसाइड्स डालें जिससे कॉकरोच घर के अंदर जगह न बना पाएं।

बारिश में ​हेल्दी डाइट है जरूरी


कड़वे और नमकीन टेस्ट वाली चीजों का सेवन अधिक करें
- चावल, छाछ, पतली दही, दूध, कद्दू, करेला, जीरा, अदरक और कच्चे प्याज का सेवन कर सकते हैं
- नींबू, आलूबुखारा, ऑरेज, आंवला, अमरूद आदि विटमिन सी से भरपूर चीजें खाएं

बारिश में क्या न खाएं


पत्तेदार सब्जियां न खाएं। इनमें सेल्यूलोज होता है, जो ठीक तरह से डाइजेस्ट नहीं हो पाता।
- स्ट्रीट फूड व फास्ट फूड।
- कटे और खुले में रखे फल।
- तेज नमक वाला खाना या खट्टी चीजें।
- फ्राइड फूड।


 
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Friday, 7 June 2019

RPP NEWS

ये घरेलू नुस्खे देंगे मुंह के छालों से आराम

 ये घरेलू नुस्खे देंगे मुंह के छालों से आराम

आर पी पी न्यूज़ - डिजिटल डेस्क - गर्मियों में अकसर लोगों के मुंह में छाले हो जाते हैं। ठीक समय पर इनका इलाज नहीं किया जाए तो यह काफी दर्द देता है। चूंकि छाला मुंह में है इसलिए इसका दर्द हमें ठीक से खाना भी नहीं खाने देता है। दर्द में जल्द आराम न मिले तो कई लोगों को कुछ पीने में भी दिक्कत होती है। मुंह में छाला हो तो गर्म और मसालेदार चीजें खाने से परहेज करें। 
छाला बच्चों के मुंह में हो जाए तो दिक्कत और भी बढ़ जाती है क्योंकि बच्चों को ऐनर्जी के लिए समय-समय पर कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। ऐसे में जब वह छाले की वजह से खाना नहीं खा पाते हैं तो काफी मुश्किल होती है। आइए, आपको कुछ घरेलू उपाय बताते हैं जिनसे मुंह के छालों में आराम मिलेगा। 
लहसुन 
लहसुन की दो-तीन कलियां लेकर इनका पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को छाले पर लगाएं। थोड़ी देर बाद ठंडे पानी से कुल्ला कर लें। छाला जल्दी ठीक हो जाएगा। 

बर्फ 
छाले पर ठंडी चीजों से आराम मिलता है। बर्फ का टुकड़ा लें और उसे छाले पर रगड़ें। आराम मिलेगा। 

देसी घी
 
छालों को ठीक करने के लिए रात को सोने से पहले देसी घी को छाले पर लगाएं। सुबह तर छालों में आराम मिलेगा। 

शहद 
शहद भी मुंह और जीभ के छालों से राहत देने में काफी मददगार है। छालों पर रोजाना तीन-चार बार शहद लगाएं। यह छाले ठीक करने में मदद करेगा। 
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Saturday, 16 March 2019

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बदलते मौसम में इन 6 बातों का रखें खास ख्याल


आर पी पी न्यूज़ : डिजिटल डेस्क - इन दिनों मौसम तेज़ी से बदल रहा है। कभी अचानक ठंड हो जाती है तो कभी गर्मी और बारिश। ऐसे ही मौसम में ज़्यादा बैक्टीरिया और कीटाणु फैलते हैं, जो बीमारियों को न्यौता भी देते हैं। इस दौरान जोड़ों के दर्द की शिकायत भी काफी बढ़ जाती है। खासकर बुजुर्ग और उम्रदराज लोगों में। ज़रा-सी सर्दी हुई नहीं कि जोड़ों का दर्द शुरू हो जाता है। इसलिए बेहद ज़रूरी है कि बदलते मौसम के साथ कदम-ताल करते हु्ए खुद के लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करें। खान-पान बदलें, ताकि मौसम की मार आपके स्वास्थ्य पर न पड़े। 
1- सबसे पहली बात तो यह ध्यान रखें कि मौसम के स्वभाव को देखते हुए ही कपड़े पहनें। यानी ठंड है और उसके बाद अचानक गर्मी, तो गरम कपड़े ही पहनें। कपड़े ज़्यादा टाइट न पहनें नहीं तो शरीर में रैशेज पड़ सकते हैं और एलर्जी भी हो सकती है।
2- बाहर की कोई भी तली-भुनी चीज, गोलगप्पे-चाट आदि खाने से बचें। इस मौसम में इन चीजों से ही बीमार होने का सबसे ज़्यादा खतरा रहता है। 
3- कई लोग अभी से घरों में पंखा चला रहे हैं जो सेहत के लिहाज से बिल्कुल भी सही नहीं है। भले ही दोपहर को गर्मी का एहसास होता हो, लेकिन सुबह-शाम ठंड ही है और ऐसे में रात को पंखा चलाकर सोना, बीमारियों को बुलावा देने के बराबर है। 
4- कई लोग ऐसे होते हैं जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अन्य लोगों के मुकाबले कम होती है। ऐसे में उन्हें मौसम संबंधी बीमारियां जैसे कि सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार जल्दी पकड़ते हैं। ऐसे लोगों को ठंडी चीजें खाने से बचना चाहिए। उन्हें ऐसी चीजें खानी चाहिए जिनसे उनका बॉडी सिस्टम मज़बूत बने। ऐसे लोग दही, आंवला, ओट्स और विटामिन डी व सी ये भरपूर चीजें खा सकते हैं। 
5- सुबह अगर पार्क में घूमने के लिए निकले हैं या वॉक पर जा रहे हैं तो गर्म कपड़े ही पहनकर जाएं। वापस आकर तुरंत पानी न पिएं और न ही वॉक के दौरान ठंडा पानी पीने से बचें। 
6- बदलते मौसम में एलर्जी होने का भी खतरा रहता है, इसलिए अदरक, लहसुन, तुलसी और काली मिर्च जैसी चीजें खाएं। 

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Saturday, 5 January 2019

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सर्दियों में लौंग की चाय के फ़ायदे

आर पी पी न्यूज़ : डिजिटल डेस्क - इस बदलते मौसम में किचन में रखे मसाले बह हमारे बड़े काम की चीज है इस ठण्ड में हम आप को बताते है की लौंग की चाय कितना फायदे मंद है -

लौंग एक ऐसी औषधी है जिसके जो कई गुणों से संपूर्ण है। वैसे तो यह सदाबाहर औषधी है लेकिन इसकी तासीर गर्म होने के चलते सर्दियों में इसके सेवन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। लौंग में फॉस्फोरस, पोटैशियम, प्रोटीन, आयरन, सोडियम, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं। सिर्फ यही तत्व ही नहीं लौंग में विटामिन 'ए' और 'सी' के साथ ही साथ मैगनीशियम और फाइबर भी पाया जाता है। सर्दियों में इन गुणों से भरपूर लौंग की चाय पीना सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। आज हम आपको लौंग की चाय के फायदों के बारे में बता रहे हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वो—

लौंग की चाय से पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर किया जा सकता है। लौंग की चाय पाचन तंत्र को भी उत्तेजित करती है तथा एसीडिटी को कम करती है। खाना खाने से पहले लौंग की बनी चाय पीने से लार के उत्‍पादन की प्रक्रिया उत्‍तेजित होती है। जो भोजन पाचने में मददगार होती है जिन लोगों को दांत में दर्द की समस्या होती है लौंग की चाय से वह भी दूर होता है। इसमें एंटीबैक्‍टीरियल गुण भी पाए जाते हैं। लौंग का तेल दांत दर्द से आराम दिलाने में बहुत ही लाभदायक होता है। लौंग का तेल लगाने से दर्द छूमंतर हो जाता है। दर्द के समय अगर एक लौंग मुंह में रख लें और उसके मुलायम होने के बाद उसे हल्के-हल्के चबाएं तो दांत दर्द ठीक हो जाता है।सिर दर्द होने पर लौंग को पीसकर माथे पर लगायें। इससे आपको फौरन फायदा होगा।
 लौंग का तेल भी दर्द में फायदेमंद होता है। नारियल के तेल में लौंग तेल की कुछ बूंदे मिलाकर सिर पर मालिश करने से दर्द दूर होता है।साइनस या चेस्‍ट में कफ की समस्‍या को दूर करने में भी लौंग की चाय सहायक होती है। अगर आपको साइनस की शिकायत हैं तो प्रतिदिन सुबह लौंग की चाय पीने से इंफेक्‍शन समाप्‍त हो जाता है और साइनस से राहत मिल जाती है। लौंग में उपस्थित यूगेनॉल भरी हुई चेस्‍ट से तुरंत राहत प्रदान करने में सहायक होता है। 
अगर आप अर्थराइटिस के दर्द से जूझ रहे हैं तो लौंग की चाय इस दर्द से राहत दिलाने में आपकी मदद कर सकती है। इसमें मौजूद शक्तिशाली एनाल्‍जेसिक तत्‍व जोड़ों, मांसपेशियों के दर्द और सूजन के लिए लाभकारी होता है। दर्द होने पर प्रभावित स्‍थान पर लौंग की चाय से सेंक करें। साथ ही नियमित रूप से 20-30 मिनट दो से तीन बार ठंडी चाय लगाने से राहत मिलती है। 
लौंग की पांच कलियों को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इसमें शहद मिलाकर दिन में तीन बार पीने से अस्‍थमा रोगी को काफी लाभ होता है। साथ ही लौंग के तेल का अरोमा भी श्‍वास रोगों से राहत दिलाने में मददगार होता है। इसे सूंघने मात्र से ही जुकाम, कफ, दमा, ब्रोंकाइटिस, साइनसाइटिस आदि समस्याओं में तुरंत राहत मिलती है।
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Saturday, 15 December 2018

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सॉफ्ट ड्रिंक सेहत के लिए बहुत खतरनाक हैं जानें इसे पीने के खतरनाक परिणाम



आज लोगो में सॉफ्ट ड्रिंक का उपयोग अपने स्टेट्स का माध्यम बन गया है चाहे वह गांव हो या शहर हर जगह केवल सॉफ्ट ड्रिंक का ही बोल बाला है इस सॉफ्ट ड्रिंक लोगो में क्या प्रभाव पड़ रहा है आइये जानते है एक रिपोर्ट के माध्यम से -
  • ब्रिटेन में फैंटा में छह चम्मच शुगर मिली होती है।
  • नीदरलैंड्स और फ्रांस में इसमें पांच चम्मच शुगर मिली हुई थी।
  • भारत में फैंटा में करीब दोगुनी मात्रा में 11 चम्मच शुगर मिली होती है।
आर पी पी न्यूज़ : डिजिटल डेस्क  आयरलैंड, अर्जेंटीना और ब्रिटेन में फैंटा में छह चम्मच शुगर मिली होती है। इतनी शुगर एक वयस्क व्यक्ति पूरे दिन में ले सकता है। मगर, एक कैन फैंटा पीते ही पूरे दिन की शुगर का कोटा पूरा हो जाता है। वहीं, भारत में फैंटा में करीब दोगुनी मात्रा में 11 चम्मच शुगर मिली होती है। सोचिए इतनी शुगर की मात्रा का आपकी सेहत पर कितना प्रतिकूल असर होगा। यानी आपके पसंदीदा कोल्ड ड्रिंक में शुगर की मात्रा पूरी दुनिया में बिकने वाले उसी ब्रांड में अलग--अलग होती है। कई देशों में तो एक ही ब्रांड के कोल्ड ड्रिंक में दोगुनी शुगर की मात्रा तक का अंतर मिला है। लोकप्रिय ब्रांड के ड्रिंक्स पर यह शोध ब्रिटेन के कैंपेन ग्रुप एक्शन ऑन शुगर ने किया है। ग्रुप की मांग है कि ब़$डे ब्रांड्स को ज्यादा शुगर की मात्रा को घटाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।

खतरनाक स्तर पर मिली है शुगर

कैंपेन ग्रुप ने 274 शुगर स्वीटेन कोल्ड ड्रिंक का परीक्षण किया और पाया कि हर प्रोडक्ट में लाल रंग का कोडेड लेबल होना चाहिए, जो यह बताए कि इसमें खतरनाक स्तर पर शुगर है।

मोटापा और खराब सेहत को बढ़ावा

इस डाटा को जमा करने वाले हेल्थ कैंपेनर्स ने चेतावनी दी कि वयस्क और बचे काफी अधिक मात्रा में इस छिपी हुई शुगर का सेवन कर रहे हैं, जो मोटापे और खराब स्वास्थ्य को ब़ढावा दे रही है।

2.16 अरब लोग होंगे मोटापे का शिकार

2030 तक दुनियाभर में करीब 2.16 अरब लोग मोटापे के शिकार होंगे और इनमें से 1.12 अरब लोगों को मोटापे की श्रेणी में रखा जाएगा।
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Friday, 30 November 2018

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ये बीमारी हो गई तो बना सकती है नामर्द, बड़ी मुश्किल से पकड़ में आती है ये बीमारी

 A Sexual disease which can transformed into a superbug
आर.पी.पी न्यूज़ पोर्टल:हेल्थ डेस्क : कहतें है जान बचे तो लाखों पायं, और ये कब होता है जब आप स्वच्छ होतें हैं | आप को जीवन भर के निराश कर देने वाला ये बीमारी मानव जाती के लिए सबसे खतरनाक साबित हो सकती है, ऐसा ही एक बीमारी है एमजी. एमजी वो संक्रामक यौन बीमारी है, जिस पर अगर ध्यान न दिया गया तो यह अगला सुपरबग साबित हो सकती है। दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ ये चेतावनी दे रहे हैं।आम तौर पर माइकोप्लाज़्मा जेनिटेलियम (एमजी) के कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते, लेकिन इससे महिलाओं और पुरुषों, दोनों के जननांगों में संक्रमण हो सकता है। ये इतना खतरनाक है कि इससे औरतों में बांझपन भी हो सकता है।
एमजी के शुरुआती लक्षण आसानी से समझ में नहीं आते इसलिए इसका इलाज भी मुश्किल है और अगर इलाज ठीक से न हो तो इस पर एंटीबायोटिक्स भी बेअसर हो सकता है। 'ब्रिटिश असोसिएशन ऑफ सेक्शुअल हेल्थ ऐंड एचआईवी' ने हालात की गंभीरता को देखते हुए बीमारी के बारे में नई सलाहें जारी की हैं।
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Thursday, 22 November 2018

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मिलवाती दूध से रहे सावधान हो सकता है गंभीर बीमारी


देश : आज के दौर में  लोगो को स्वस्थ रहने के लिए दूध एक अहम पेय के रूप में जाना जाता है लेकिन इस मिलावट के दौर में यह भी शुद्ध नहीं मिलपा रहा है लोग पैसे के लालच में किसी  भी  जिन्दगियों से खिलवाड़  से परहेज  करते | यही कारण है की आज के मिलावट का असर हर उम्र के लोगो में देखने को मिल रहा है | 
आर .पी .पी न्यूज़ पोर्टल: डिजिटल ब्यूरो : चिकित्सकों का कहना है कि करीब दो साल तक लगातार मिलावटी दूध पीते रहने पर लोग इंटेस्टाइन, लिवर या किडनी डैमेज जैसी खतरनाक बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के हालिया अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत में बिकने वाला करीब 10 प्रतिशत दूध हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इस 10 प्रतिशत में 40 प्रतिशत मात्रा पैकेज्ड मिल्क की है जो हमारे हर दिन के भोजन में इस्तेमाल में आता है। यह 10 प्रतिशत कॉन्टैमिनेटेड मिल्क यानी दूषित दूध वह है, जिसकी मात्रा में वृद्धि दिखाने के लिए इसमें यूरिया, वेजिटेबल ऑयल, ग्लूकोज या अमोनियम सल्फेट आदि मिला दिया जाता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही नुकसानदायक हैं।
श्री बालाजी ऐक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के गैस्ट्रोइंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर जी.एस. लांबा के अनुसार, मिलावटी या कॉन्टैमिनेटेड दूध से होने वाला नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि कॉन्टैमिनेशन कैसा है। अगर दूध में बैक्टीरियल कॉन्टैमिनेशन है तो आपको फूड प्वाइजनिंग, पेट दर्द, डायरिया, इंटेस्टाइन इंफेक्शन, टाइफाइड, उल्टी, लूज मोशन जैसे इंफेक्शन होने का डर होता है। उन्होंने कहा, "कई बार मिनरल्स की मिलावट होने पर हाथों में झनझनाहट या जोड़ों में दर्द भी शुरू हो जाता है। वहीं अगर दूध में कीटनाशक या केमिकल्स की मिलावट है या पैकेजिंग में गड़बड़ है तो इसका आपके पूरे शरीर पर लंबे समय के लिए बहुत खराब असर पड़ता है। इस तरह के मिलावटी दूध को काफी समय से यानी करीब दो साल से लगातार पीते रहने पर आप इंटेस्टाइन, लिवर या किडनी डैमेज जैसी खतरनाक बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।"
पुष्पावती सिंघानिया हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की कंसल्टेंट पीडियाट्रिक्स डॉक्टर अंजलि जैन बताती हैं कि इस तरह के कॉन्टैमिनेटेड दूध में कुछ ऐसी केमिकल की मिलावट भी होती है जिनसे कार्सियोजेनिक समस्याएं भी हो सकती हैं। अगर आप करीब 10 साल तक इस मिल्क प्रोडक्ट को ले रहे हैं तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होने की संभावना हो सकती है। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने दूध में किसी भी तरह की मिलावट के लिए उम्र कैद की सजा तय की है, फिर भी इस तरह की स्टडी रिजल्ट्स का आना उन सबके लिए चिंता का विषय है जो अपनी रोजाना की लाइफ में पैकेज्ड दूध का प्रयोग करते हैं। पैकेज्ड दूध की क्वालिटी पर हमारा कोई नियंत्रण तो नहीं होता पर कुछ छोटी-छोटी बातों को अपनाकर हम उसके दुष्प्रभाव को कम कर सकते हैं।
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Monday, 19 November 2018

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पर्यावरण प्रदूषण से अस्थमा मरीजों की संख्या एनसीआर में कई गुना बढ़ी : विशेषज्ञ




आर पी पी न्यूज़ पोर्टल :डिजीटल ब्यूरो  : दिल्ली एन सी आर दिवाली में हुए आतिशबाजी की वजह से आज यहा के वातावरण में इतना प्रदुषण फ़ैल गया है की सास लेने में दिक्कत हो रही है और लोगो का घरो से बाहर निकलना मुस्किल हो गया है |
एनसीआर में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। हवा गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार, नोएडा में हवा की गुणवत्ता गिर कर 444 एक्यूआई के गंभीर स्तर पर आ गई है। इसका बुरा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सांस की बीमारियों, आंखों और त्वचा के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्थमा के मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। नोएडा के जेपी अस्पताल में पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ज्ञानेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि इस मौसम में प्रदूषण के इस स्तर के कारण अस्थमा के मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है और यदि प्रदूषण में सुधार नहीं हुआ तो यह संख्या और भी बढ़ सकती है। हर बीमारी का कारण है खराब पाचन शक्ति, इसे यूं रखें दुरुस्त|

इससे बचाव : 

उन्होंने कहा, 'ऐसे समय में यथासंभव घर के अंदर ही रहें। आउटडोर गतिविधियां जैसे रनिंग, जॉगिंग, साइक्लिंग, जिम आदि न करें। नवम्बर से जनवरी के बीच सुबह के समय घर से बाहर न जाएं। धूल की एलर्जी से बचने के लिए अपने मुंह को रूमाल से ढक कर रखें।'



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Saturday, 17 November 2018

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बच्चों में बढ़ता इंसुलिन की कमी , बरतें सावधानी


आर पी पी न्यूज पोर्टल महराजगंज :  डिजिटल  ब्यूरो  :  आज देश में बढती हुई सुगर की बीमारी बिकराल रूप लेते जा रहा है जिसमे बच्चों से लेकर बुजूर्ग तक इसी चपेट में है यह बीमारी इतनी आम हो चुका है की कब किसे हो जाये पता ही  नही चलता| सुगर होने का मुख्य कारण अनियमित खान - पान और बैलेंस डाइट न होना है आज कल यह बीमारी छोटे बच्चे  में ज्यादा देखने को मिल रहा है इसका कारण जब उनका शरीर किसी भी कारण से आवश्यकतानुसार इन्सुलिन नहीं बना पाता। जो शक्कर उनके शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का काम करती, वही शक्कर उनके रक्त में जाकर एक भयंकर बीमारी का रूप ले लेती है, जिसका इलाज जल्द से जल्द होना चाहिए। न्यूट्री एक्टीवीनिया की संस्थापक अवनी कौल ने कहा कि यह बीमारी बच्चों में क्यों होती है इसका कारण अभी पता नहीं चला है, हालांकि बीमारी से लड़ने की क्षमता जब कम हो जाती है को कई बीमारियां हमला करती हैं। ऐसे ही शरीर में मधुमेह जैसी बीमारियों का वास होता है। यदि परिवार के बड़े लोग मधुमेह से ग्रसित होते हैं, तब भी बच्चों को यह बीमारी हो सकती है क्योकि यह वंशानुगत भी होती है।
उन्होंने कहा कि जब बच्चों को जरूरत से ज्यादा भूख अथवा प्यास लगे, धुंधला दिखने लगे, वजन बिना कारण कम होने लगे अथवा थकान अधिक लगने लगे, उस समय सर्तक हो  जाना चाहिए। उनकी तुरन्त जांच करवानी चाहिए ताकि अगर वे मधुमेह से ग्रसित हों तो जल्दी ही उनका इलाज शुरू किया जा सके। अवनी ने कहा कि बीमार व्यक्ति चाहे बच्चा हो अथवा बड़ा, उसके लिए रक्त में शक्कर की मात्रा पर नियंत्रण रखना अनिवार्य है। यह वह पौष्टिक आहार खाकर एवं नियमित रूप से व्यायाम करके नियन्त्रित कर सकता है। कभी कभी इन्सुलिन की आवश्यकता भी पड़ सकती है। रक्त में शक्कर की मात्रा पर नजर रखना चाहिए ताकि उसमें उतार-चढ़ाव की जानकारी तुरन्त मिल सके। इन्सुलिन की कमी से सांस तेज चलने लगती है, त्वचा एवं मुंह सूखने लगता है, सांस से बदबू आने लगती है, उल्टी आने का अंदेशा रहता है एवं पेट में दर्द हो सकता है। यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

बच्चों में डायबिटीज से बचाव


बच्चों में डायबिटीज अब आम हो चली है। यह बड़ों में पाई जाने वाली डायबिटीज से अलग है। इसमें शुगर को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन ही देनी पड़ती है। इसमें टेबलेट की कोई भूमिका नहीं। तो ऐसे बच्चों इंसुलिन देनी ही पड़ेगी, शुगर की जांच करनी पड़ेगी और उसको कण्ट्रोल में रखना पड़ेगा। ताकि आगे जाकर ज्यादा परेशानी ना उठानी पड़े|
 


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Monday, 12 November 2018

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सेहत के लिए खतरनाक है प्लॉस्टिक, जानें इसके नुकसान


यूआर पी पी न्ज पोर्टल : डिजिटल ब्यूरो :
हमारी जिंदगी में हर जगह प्लास्टिक की घुसपैठ है। सिर्फ किचन की बात करें तो नमक, घी, तेल, आटा, चीनी, ब्रेड, बटर, जैम और सॉस, सब कुछ प्लास्टिक में पैक होता है। तमाम चीजें भी प्लास्टिक के कंटेनर्स में ही रखी जाती हैं। सस्ते, हलके और लाने-ले जाने में आसान होने की वजह से लोग प्लास्टिक कंटेनर्स को पसंद करते हैं। खाने-पीने की चीजों में इस्तेमाल किया जाने वाला प्लास्टिक नुकसानदायक हो सकता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि प्लॉस्टिक कितना नुकसानदायक होता है।
 एक रिसर्च के मुताबिक, पानी में न घुल पाने और बायोकेमिकल ऐक्टिव न होने की वजह से प्योर प्लास्टिक कम जहरीला होता है लेकिन जब इसमें दूसरे तरह के प्लास्टिक और कलर्स मिला दिए जाते हैं तो यह नुकसानदेह साबित हो सकता है। गर्मी के मौसम में ये केमिकल्स खिलौने या दूसरे प्रोडक्ट्स में से पिघलकर बाहर निकल सकते हैं। इस खतरे को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने बच्चों के खिलौनों और चाइल्ड केयर प्रोडक्ट्स में इस तरह के प्लास्टिक के इस्तेमाल को सीमित कर दिया है। यूरोप ने साल 2005 में ही इस पर बैन लगा दिया था तो जापान समेत 9 दूसरे देशों ने भी बाद में इस पर पाबंदी लगा दी।

यूं तो हम सभी लोग पानी के लिए बोतल या खाना रखने के लिए प्लास्टिक लंच बॉक्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन क्या कभी हमने उन्हें पलटकर देखा है कि उनके पीछे क्या लिखा है? क्या इस पर कोई सिंबल तो नहीं बना हुआ है? दरअसल, अच्छी क्वॉलिटी के प्रोडक्ट पर सिंबल्स का होना जरूरी है।

यह मार्क ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड जारी करता है और इससे पता लगता है कि प्रोडक्ट की क्वॉलिटी अच्छी है। इन सिंबल्स (क्लॉकवाइज ऐरो के ट्राइएंगल्स) को रीजन आइडेंटिफिकेशन कोड सिस्टम कहते हैं। इन ट्राइएंगल्स के बीच में कुछ नंबर्स भी होते हैं। इन नंबरों से ही पता चलता है कि आपके हाथ में जो प्रोडक्ट है, वह किस तरह के प्लास्टिक से बना है।
 
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Saturday, 10 November 2018

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सोराइसिस क्या है जाने इसके लक्षण और बचाव



आर पी पी न्यूज़ पोर्टल:डिजिटल ब्यूरो :
दुनियाभर में सोराइसिस रोग से तीन फीसदी आबादी यानी करीब 12.50 करोड़ लोग प्रभावित हैं। रोग प्रतिरोधक प्रणाली की गड़बड़ी से सोराइसिस रोग होता है। इसका कास्मेटिक या त्वचा के प्रकार से कोई संबंध नहीं है हालांकि इस बीमारी के होने के बाद इससे जुड़ी कई दूसरी बीमारियां और परेशानियां हो सकती है। विश्व में 29 अक्टूबर को विश्व सोराइसिस दिवस के रूप में मानाया जाता है। इस साल की ग्लोबल थीम में सोराइसिस के लक्षणों के महत्व पर जोर डाला गया है। सोराइसिस को अक्सर स्किन इंफेक्शन या कॉस्मेटिक प्रॉब्लम माना जाता है, जिसका आसानी से इलाज हो सकता है। लेकिन दरअसल सोराइसिस इसके बिल्कुल उलट है।
दरअसल, सोराइसिस रोग तभी होता है जब रोग प्रतिरोधक तंत्र स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करता है। इससे त्वचा की कई कोशिकाएं बढ़ जाती है, जिससे त्वचा पर सूखे और कड़े चकत्ते बन जाते है क्योंकि त्वचा की कोशिकाएं त्वचा की सतह पर बन जाती है। नोएडा स्थित मैक्स मल्टी स्पेश्लियटी अस्पताल में डमाटरेलॉजी कंसलटेंट डॉ. राजीव सेखरी ने कहा, "त्वचा पर होने वाले अन्य रोगों से अलग सोराइसिस नाम का रोग अति सक्रिय प्रतिरोधक प्रणाली से होता है, जिसमें शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली ही स्वस्थ कोशिकाओं और ऊतकों पर हमला करती है। 
सोराइसिस के सामान्य लक्षणों में शरीर के प्रभावित सामान्य अंगों में खुजली होती है। त्वचा पर पपड़ी जैसी ऊपरी परत जम जाती है। शरीर में लाल-लाल धब्बे और चकत्ते हो जाते हैं। सोराइसिस का कोई संपूर्ण इलाज नहीं है, लेकिन सोइरासिस के लक्षणों की गंभीरता के बावूद इसे काफी हद तक कंट्रोल किया या जा सकता है।" धारणा के विपरीत सोराइसिस किसी को छूने से नहीं फैल सकता और केवल कुछ मामलों में यह वंशानुगत हो सकता है।
हालांकि सोराइसिस के लक्षणों को हम अपने समाज में गंभीरता से नहीं लेते। बीमारी को नजरअंदाज करने और सोराइसिस रोग के संबंध में जागरूरकता की कमी से समय पर रोग का पता नहीं चल पाता और इस बीमारी के इलाज में काफी रुकावट आती है। त्वचा और शरीर पर होने वाले दूसरे रोगों का तो इलाज हैए लेकिन सोराइसिस का कोई इलाज नहीं है। इसलिए सोराइसिस के लक्षणों के प्रति जागरूक रहना बहुत आवश्यक है और इसके कुछ खास लक्षणों को देखकर रोग के इलाज की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए।सोराइसिस का समय से और प्रभावी ढंग से इलाज न किया गया तो सोराइसिस से कई दूसरी सहायक बीमारियों का जन्म हो सकता है। बदकिस्मती से सोराइसिस का कोई इलाज नहीं है। हालांकि समय से रोग की पहचान और बीमारी के प्रभावी प्रबंधन से स्थिति को बेहतर रखा जा सकता है। त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास जाकर इस रोग को पहचानने में मदद मिल सकती है।
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Monday, 5 November 2018

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तनाव मुक्त रहने के लिए रोना जरुरी



महराजगंज : अभी तक आप ने हसने के फ़ायदे जानते होगे,क्या आप को रोने के फयदे मालूम है नही तो आइये हम आप को रोने के होने वाले  फायदे के बारे में बता रहे है
 आर पी .पी न्यूज पोर्टल :डिजिटल ब्यूरो :दुनिया में जापानियों को काफी मेहनती माना जाता है। यहां के लोग कामो से सबसे कम छुट्टियां लेते हैं और सबसे ज्यादा काम करते हैं। हालांकि इस वजह से उन्हें काफी तनाव हो रहा है। ऐसे में अपने नागरिकों को तनाव मुक्त रखने के लिए जापान सरकार एक नया तरीका अपना रही है। यहां लोगों का तनाव भगाने के लिए उन्हें हंसाने की बजाय रुलाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। कंपनियां और स्कूल अपने कर्मचारियों और छात्रों को हफ्ते में एक दिन जमकर रोने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। रोने के फायदे बताने के लिए खास तरह केटीयर्स टीचरयानी आंसू लाने वाले ट्रेनर भी तैयार किए जा रहे हैं।

रोने के फायदों पर किया शोध
जापान की एक हाई स्कूल टीचर 43 साल की हीदेफूमी योशिदा ने पांच-छह साल पहले रोने से होने वाले फायदों पर शोध और प्रयोग शुरू किए। अब उन्हें जापान में नामिदा सेंसेई यानी टीयर्स टीचर के तौर पर जाना जाता है। योशिदा की जापानी कंपनियों और स्कूलों में भारी मांग है। इन्हें कंपनियों और स्कूलों में रोने के फायदे बताने और लोगों को रुलाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। हर कोई जानता है कि खुलकर हंसना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। लेकिन एक बात ये भी जान लें कि जिस तरह हंसना सेहत के लिए फायदेमंद है, उसी तरह फूट फूटकर रोना भी बेहद जरूरी है। रोना भी आपकी सेहत को उतना ही फायदा देता है, जितना हंसना। तो जानिए रोने के फायदे..कहते हैं कि हंसना सेहत के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन कोई यह नहीं कहता कि रोना भी फिट रहने के लिए बेहद जरूरी है। अक्सर जब कोई रोता है, तो उसे पसंद नहीं किया जाता और रोने से रोक दिया जाता है। लेकिन हाल ही में आई एक स्टडी के मुताबिक, जिस तरह से पसीना और यूरिन के माध्यम से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं, वैसे ही आंसू आने से भी होता है एक अध्ययन के अनुसार, स्ट्रेस की वजह से रोना और आंखों में परेशानी की वजह से पानी आने में अंतर है। जब हम रोते हैं तो शरीर से एड्रेनोकॉर्टिकोट्रोपिक और ल्यूसीन नामक स्ट्रेस हॉर्मोन निकलते हैं लेकिन आंखों से पानी आने से ऐसा कुछ नहीं होता।आंसू आंखों में मेमब्रेन को सूखने नहीं देते। इसके सूखने की वजह से आंखों की रोशनी में फर्क पड़ता है, जिस वजह से लोगों को कम दिखना शुरू हो जाता है। मेमब्रेन सही बना रहता है, तो आंखों की रोशनी लंबे समय तक ठीक बनी रहती है। आंसुओं में लाइसोजाइम नामक तत्व पाया जाता है, जो बाहरी बैक्टीरिया को नष्ट करने में सहायक होता है। इससे आंखों में इंफेक्शन नहीं होता और आंखें हेल्दी बनी रहती हैं। यह तत्व तभी आंखों से निकलता है, जब आप रोते हैं। रोने से तनाव दूर होता है। इस वजह से आपका मूड भी अच्छा होता है। कई लोग अपने गुस्से और तनाव को दबा लेते हैं जो आगे चलकर भयंकर रूप ले लेता है। अगर तनाव भगाना हो और रोने का मन हो तो रो लेना चाहिए। कुछ लोगों को लगता है कि रोने से उनके स्वाभिमान को चोट पहुंच जाएगी। ऐसी सोच ज्यादातर लड़कों की होती है, वे रोना चाहते हैं पर रो नहीं पाते। शोध कहते हैं कि अगर एक बार खुलकर रो लिया जाए तो इससे आपका मूड अच्छा हो जाता है। डिप्रेशन में जाने के बाद बहुत से लोग कई तरह की दवाइयों, योग आदि का सहारा लेते हैं। लेकिन ऐसे में रोना सबसे अच्छा माना जाता है। जो भी आपके करीब हो उसे गले लगाकर रोने से दिल हल्का हो जाता है और जीवन का आनंद आता है।
मनोचिकित्सक भी देते हैं रोने की सलाह
रोने के तनाव से संबंध को लेकर 16 साल पहले 30 देशों में एक सर्वे हुआ था। इस सर्वे में हिस्सा लेने वाले 60 फीसदी से ज्यादा लोगों ने माना था कि तनाव से लड़ने में रोना उनके लिए ज्यादा असरदार साबित होता है। वहीं दुनिया के 70 फीसदी मनोचिकित्सक तनाव से जूझ रहे लोगों को रोने की ही सलाह देते हैं।
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