
भीड़ हिंसा: छात्रा को अगवा करने पहुंचे, तीन बदमाशों की पीट-पीटकर हत्या
आर .पी.पी न्यूज़ :बिहार :आज देश में भीड़ हिंसा की बढ़ती घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही। ये ताजा मामला
बिहार के बेगुसराय का है। यहां बेकाबू भीड़ ने अपहरण के शक में शुक्रवार को
तीन लोगों को मौत के घाट उतारते समय थोडा भी मानवता का ख्याल नही हुआ ।
जिले के छौराही थाना क्षेत्र के पंसल्ला गांव स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय में तीन बदमाश हथियारों के साथ एक छात्रा का अपहरण करने पहुंचे थे। स्कूल के प्रधानाचार्य ने इसका विरोध करते हुए बदमाशो से लड़ गयें और बदमाशों की उसने हाथापाई हुई और विद्यालय परिसर में हल्ला मच गया।
जिसके बाद बदमाशों को ग्रामीणों ने चौतरफा घेर लिया। भीड़ के आगे हथियार से लैस अपराधियों की भी एक न चली। और तीनों को भीड़ ने जमकर पीटा। जिसमें से एक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो बदमाशों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने ऐसा नहीं करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रिपोर्ट पेश करने का अंतिम अवसर देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश नहीं की तो उनके गृह सचिवों को न्यायालय में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होना पड़ेगा। और वह पूर्ण रूप से जबाब देहीं होंगे।
वहीं शीर्ष अदालत ने 17 जुलाई को कहा था कि 'भीड़तंत्र की भयावह हरकतों' को कानून पर हावी नहीं होने दिया जा सकता। इसके साथ ही गोरक्षा के नाम पर हिंसा और भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या के मामलों में कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। न्यायालय ने सरकार से कहा था कि इस तरह की घटनाओं से सख्ती से निबटने के लिये वह नया कानून बनाने पर विचार भी करे।
जिले के छौराही थाना क्षेत्र के पंसल्ला गांव स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय में तीन बदमाश हथियारों के साथ एक छात्रा का अपहरण करने पहुंचे थे। स्कूल के प्रधानाचार्य ने इसका विरोध करते हुए बदमाशो से लड़ गयें और बदमाशों की उसने हाथापाई हुई और विद्यालय परिसर में हल्ला मच गया।
जिसके बाद बदमाशों को ग्रामीणों ने चौतरफा घेर लिया। भीड़ के आगे हथियार से लैस अपराधियों की भी एक न चली। और तीनों को भीड़ ने जमकर पीटा। जिसमें से एक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो बदमाशों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को चेतावनी
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आज ही भीड़ हिंसा पर राज्यों को सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई की 29 राज्यों तथा सात केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल 11 ने भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और गोरक्षा के नाम पर हिंसा जैसे मामलों में कदम उठाने के शीर्ष अदालत के आदेश के अनुपालन के बारे में रिपोर्ट पेश की है।प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने ऐसा नहीं करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रिपोर्ट पेश करने का अंतिम अवसर देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश नहीं की तो उनके गृह सचिवों को न्यायालय में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होना पड़ेगा। और वह पूर्ण रूप से जबाब देहीं होंगे।
वहीं शीर्ष अदालत ने 17 जुलाई को कहा था कि 'भीड़तंत्र की भयावह हरकतों' को कानून पर हावी नहीं होने दिया जा सकता। इसके साथ ही गोरक्षा के नाम पर हिंसा और भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या के मामलों में कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। न्यायालय ने सरकार से कहा था कि इस तरह की घटनाओं से सख्ती से निबटने के लिये वह नया कानून बनाने पर विचार भी करे।
