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Saturday, 4 January 2020

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गर्म चाय पीना कहीं आपके सेहत को पहुंचाता है नुकसान, पढ़े पूरी खबर

आर.पी.पी न्यूज़:(हेल्थ डेस्क) चाय एक ऐसा पेय, जो हम हिंदुस्तानियों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गया है। अधिकतर लोगों के लिए हर दिन की शुरुआत सुबह की चाय के साथ होती है। अगर आप भी चाय पीने के शौकीन हैं तो हाल ही में हुए शोध पर आधारित यह खबर आपके लिए है। नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों का दिमाग चाय नहीं पीने वाले लोगों की अपेक्षा ज्यादा तंदुरुस्त रहता है। ये तो हो गई फायदे की बात, लेकिन अक्सर गर्म चाय पीना हमारी सेहत को भारी नुकसान भी पहुंचा सकता है। आइए, जानते हैं चाय पीने को लेकर हुआ हालिया शोध क्या कहता है:
सिंगापुर में हुए एक शोध में ऐसा दावा किया गया है कि नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों का दिमाग, चाय नहीं पीने वाले लोगों की तुलना में ज्यादा तेज काम करता है। पूर्व में भी हुए कई शोधों में ये बात प्रमाणित हो चुकी है। दरअसल, दिमाग के प्रत्येक हिस्से का व्यवस्थित रहना स्वस्थ संज्ञानात्मक क्रिया यानी कि दिमाग की प्रतिक्रिया से जुड़ा हुआ है।
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के असिस्टेंट प्रोफेसर फेंग लेई की अगुवाई में शोधार्थियों ने इन परिणामों तक पहुंचने के लिए 36 उम्रदराज लोगों के न्यूरोइमेजिंग डाटा को खंगाला। यह अध्ययन 2015 से लेकर 2018 के बीच 60 साल और उससे अधिक उम्र वाले 36 बुजुर्गों पर किया गया जिसमें उनकी सेहत संबंधी डाटा जुटाया गया।

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Saturday, 19 October 2019

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वैज्ञानिक भी मानतें हैं अपने दादा-दादी के साथ खुश रहतें हैं बच्चे


आर.पी.पी न्यूज़:(हेल्थ डेस्क) बचपन मे अपने दादा-दादी के साथ गुजारे हुए पल, हमारी जिंदगी के सबसे यादगार पलों में से एक होते है। दादा-दादी या नाना-नानी का होना बच्चे के बचपन को सुखद बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे बच्चे, जो अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रहते हैं, उनमें एक अलग तरीके की समझ और एक खास किस्म की संवेदनाएं होती हैं। ऐसे बच्चे हमशा खुश, मिलनसार और चीजों को बांटकर इस्तेमाल करने वाले होते हैं। इनमें परिवार में रहने और सभी की भावनाओं की कद्र करने की खास कला होती है। पर आज जिस तरह शहर बढ़ रहा है और हमारे कमरे छोटे पड़ रहे हैं, लोग अकेले हो रहे हैं। सब अपनी एक छोटी सी फैमिली में रहते हैं, जिनमें दादा-दादी या नाना-नानी मेहमान बन कर रह जाते हैं। पर आपको पता है कि सांइस के अनुसार-आपको अपने बच्चों को अपने मां-बाप के साथ ही रखना चाहिए। साइंस की मानें, तो जो बच्चे अपने दादा-दादी या नाना- नानी के साथ रहते हैं, वो बाकी अकेले रहने वाले बच्चों से काफी अलग होते हैं। आज हम आपको ऐसे 5 कारण बताएंगे कि आखिरकार क्यों जरूरी है बच्चों का अपने गैन-पैरेंट्स के साथ रहना। बच्चे अपनी जड़ो के बारे में जानकर सीखते हैं कई गुण
जब बच्चे अपने परिवार के इतिहास के बारे में बहुत कुछ जानते हैं और अपने दादा दादी की भावनात्मक बातें समझा करते हैं, तो इस तरह बच्चों में किसी से भी जुड़ाव रखने की भावना को प्रबलता मिलती है। बच्चे न सिर्फ दादा-दादी के और करीब आ जाते हैं, बल्कि उनमें स्नेह, आदर और सेवा जैसे मानवीय गुण विकसित होते हैं। जिससे, बच्चे काफी लचीले और परिस्थिति अनुसार रहना सीख जाते हैं। साथ ही ऐसे बच्चों का दिमाग तेज भी होता है। वे दूसरों की तुलना में अधिक स्मार्ट और परिपक्व दिखाई देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब वे अपने परिवार के इतिहास और कठिनाई के बारे में जानते हैं, तो वे उससे सीखते हैं कि कैसे मुश्किलों में भी आगे बढ़कर, अपनी लड़ाई लड़ी जाती है।भावनात्मक तरीके से बनते हैं मजबूत...
जब बच्चे अपने दादा-दादी के साथ बहुत समय बिताते हैं, तो उनके पास किसी भी भावनात्मक या व्यवहार संबंधी परेशानियों से निपटने के लिए बेहतर समझ पैदा हो जाती है। आगे चलकर बड़े होने पर यही चीजें उन्हें किसी भी तरह के आघात का सामना करने में सक्षम बनाते हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि दादा-दादी के संपर्क में रहने वाले बच्चे अकेलेपन, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से कम पीड़ित होते हैं। वह हर तरीके से रहना सीख लेते हैं। उन्हें हर मुश्किल का हल निकालना आ जाता है। सीखते हैं नैतिक गुण
मुख्य रूप से, माता-पिता का काम है कि वे अपने बच्चों में अच्छे संस्कार और नैतिकता पैदा करें। उन्हें सहानुभूति और दया सिखाएँ लेकिन दादा-दादी इस मामले में एक बड़ी मदद कर सकते हैं। दादा-दादी या नाना-नानी विश्वास, प्रेम और शुरुआती शिक्षा के स्तंभ के रूप में कार्य करते हुए। वे बच्चों को अच्छी कहानियां सुनाकर ही सिखा लेते हैं कि जीवन में कुछ चीजें क्यों जरूरी है। दादी-नानी की कहानियां बच्चों को ज्ञान देते हैं। ऐसे इन बच्चों के जीवन पर इन नैतिक कहानियों का अच्छा प्रभाव पडता है। आपका बच्चा अपने दादा-दादी से थोड़ी सी सीख, संस्कार और नैतिकता सीखकर एक सुंदर, समझदार और सम्मानित व्यक्ति के रूप में विकसित हो सकता है।

आपके मां-बाप भी रहेंगे खुश और सेहतमंद...
गैन-पैरेंट्स का आपके बच्चों के साथ रहना न सिर्फ आपके बच्चे को खुश और स्वस्थ रखता है, ब्लकि यह आपके बूढ़े मां-बाप के लिए भी अच्छा है। आपके बच्चों के साथ रहकर आपके मां-बाप खुश रहते हैं। वह कभी अकेला महसूस नहीं करते और ना ही उन्हें खालीपन का अहसास होता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ माता-पिता डिप्रेशन और भूलने की बामारी आदि के शिकार हो जाते हैं। गौर करने की बात यह है कि यह सारी बीमारियां अकेलेपन और खाली होने से होती है। ऐसे में आपके बच्चों के साथ रहकर आपके मां-बाप खुश और स्वस्थ रह सकते हैं। 
अपने माँ-बाप को बोझ ना समझें, माँ-बाप की दुआओं में बड़ा असर होता है,  सिर्फ हम ही नही हमारी संताने भी माँ-बाप के रहने से खुश होतीं हैं। हमें विश्वास हैं कि आपको यह ख़बर जरूर अच्छी लगी होगी। अगर आप हर सोमवार ऐसी ही रोचक जानकारी प्राप्त करना चाहतें हैं तो देखें आर.पी.पी न्यूज़ या हमारी वेबसाइट www.rppnewsportal.com  पर आकर हेल्थ टैग देखें, या इस लिंक पर क्लिक कर व्हाट्सएप ग्रुप जॉइन करें https://chat.whatsapp.com/ATbLPGRwQXFEhxOPfi9GgG
राजन पटेल की रिपोर्ट, आर.पी.पी न्यूज़ के लिए
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Monday, 7 October 2019

RPP NEWS

बदलते मौसम में रखे ख्याल ,करे घरेलु उपाय

बदलते मौसम में लोगो का तबियत ख़राब होना आम बात है , इस समय मौसम में बदलाव के कारण हमार शारीर उस मौसम के अनुसार  ढल में समय लगता है इस वजह से लोगो की तबियत ख़राब होती है साथ ही इस समय वातावरण में प्रदुषण होने का सभावना ज्यादा होता है |



आर पी पी न्यूज़ :- डिजिटल डेस्क - प्रदूषण बढ़ने के साथ ही श्वासन तंत्र में गड़बड़ी होने लग जाती है। तापमान में अचानक बदलाव, मौसम में खुश्की के अलावा प्रदूषण के छोटे-छोटे कण हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और ये श्वांस नली से लेकर फेफड़ों तक में जम जाते हैं। इससे सर्दी-जुकाम, खांसी आदि समस्याएं होती हैं। आगे जाकर ये ब्रॉन्काइटिस, अस्थमा, सीओपीडी जैसी समस्याओं में भी बदल सकती हैं। इन सबसे बचने के लिए आयुर्वेद के साथ-साथ घरेलू नुस्खे भी काफी कारगर हैं। बढ़ते प्रदूषण से लोग परेशान हैं। खासकर रोज ट्रैवल करने वाले कामकाजी लोगों को पलूशन से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कैसे हम अपनी इम्युनिटी को बढ़ाकर प्रदूषण के असर को कम कर सकते हैं, बता रहे हैं आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ. आर. पी. पाराशर

शरीर में जब सर्दी-जुकाम के रूप में प्रदूषण के प्रति प्रतिक्रिया दिखने लगे तो 2 गिलास गर्म पानी पीकर मुंह ढककर मोटा कपड़ा ओढ़ लें और 20 मिनट पसीना आने दें। बलगम आसानी से बाहर निकल जाएगा। ऐसा 2 बार कर सकते हैं, लेकिन रात में जरूर करें ताकि दिन भर के प्रदूषण का असर कम किया जा सके।

• हल्दी को पानी में उबालकर उससे गरारे करें। हल्दी के पानी को पी भी सकते हैं।
• नमक के गरारे करें या पानी में मिलाकर पिएं।
• कमर और छाती पर देसी घी में थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर मालिश करें। सैंधवादि तेल से भी मालिश कर सकते हैं। इससे अंदर जमा बलगम बाहर निकलेगा। दिन में 3-4 बार मालिश करनी चाहिए।
• आयुर्वेद में सर्दी-जुकाम, इन्फेक्शन आदि के लिए तालीशादि चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण, अभ्रक भस्म, चंद्रअमृत रस, लक्ष्मीविलास रस, वासाअवलेह, कनकासव, श्वासकुठा रस आदि दवाएं दी जाती हैं। श्वासकुठा रस अस्थमा में खासा असरदार है, लेकिन कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।

• सौंठ, काली मिर्च, छोटी पिपली को एक साथ मिलाकर या अलग-अलग भी ले सकते हैं। 2-3 काली मिर्च, 5-7 पिपली, आधा इंची सौंठ को पानी में उबालकर या पीसकर सेवन करें। इन्हें आयुर्वेद में त्रिकटु के नाम से जाना जाता है। ये शरीर में गहरे तक जाकर प्रदूषण के कण बाहर निकाल देते हैं।
• रोजाना थोड़ा-सा गुड़ (करीब 5 ग्राम) खाएं। इससे फेफड़े साफ होते हैं और धमनियां भी साफ होती हैं। चाय में गुड़ डालकर भी ले सकते हैं। रात में सोने से पहले भी गर्म दूध के साथ गुड़ ले सकते हैं। गुड़ को यों ही या फिर तिल के लड्डू बनाकर खा सकते हैं।

• पिसी काली मिर्च को शहद के साथ लेने से सीने में जमा कफ दूर होता है।
• नाक को साफ रखने के लिए गाय के शुद्ध घी की एक-एक बूंद सुबह और शाम नाक में डालें। इससे हानिकारक तत्व फेफड़ों तक नहीं पहुंचते।
• खट्टे फल खाएं, लेकिन सर्दियों में इन्हें धूप में रखकर या थोड़ी देर माइक्रोवेव में रखकर गर्म कर लें। हल्का गर्म होने पर खाएं तो नुकसान नहीं होगा।
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Friday, 2 August 2019

RPP NEWS

मॉनसून में जरा सी लापरवाही बना सकती है बीमार


मॉनसून में जरा सी लापरवाही बना सकती है बीमार

बारिश को देखना और उसमें भीगना हर किसी को अच्छा लगता है। लेकिन दिक्कत तब आती है, जब थोड़ी सी लापरवाही आपको बीमार बना देती है। इसलिए जरूरी है कि मॉनसून में होने वाली दिक्कतों और बीमारियों से दूर रहने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरती जाएं। बारिश में हाइजीन यानी सफाई का विशेष ध्यान रखें। इन टिप्स को करें फॉलो...


हाथों की सफाई

जितनी भी प्रॉब्लम्स स्टार्ट होती हैं, वो हाथों की गंदगी से होती है। इसलिए कुछ भी खाने से पहले हाथ धो लें। बिना हाथ धोए कोई भी चीज टच न करें। यहां तक कि बाल व अपनी स्किन को भी नहीं। अगर नाखून बढ़ाने के शौकीन हैं, तो बारिश के मौसम में इन्हें छोटा ही रखें।


गीले कपड़े तुरंत उतारें


अगर आप बारिश में भींग गए हैं, तो जितनी जल्दी संभव हो, ड्राई व क्लीन कपड़े पहन लें। खासतौर पर गीले अंडरगार्मेंट्स पहनकर रखने से फंगल इन्फेक्शन का खतरा रहता है। लिहाजा बारिश के मौसम में जूते, मोजे व इनरवेयर को हमेशा सूखा रखें।

पैरों की क्लीनिंग

बारिश के मौसम में पैर सबसे ज्यादा पानी से भीगते हैं, इसलिए फंगल इन्फेक्शन का चांस अधिक रहता है। इसलिए...
-पैरों की सफाई के लिए ऐंटिसेप्टिक का इस्तेमाल करें।
- नॉयलान की जगह कॉटन के मोजे पहनें।
- गीले हो गए मोजे को तुरंत बदलें।
- पैरों को डीप क्लीन करने के लिए समय-समय पर पेडिक्योर करवाएं।
- नंगे पांव बिल्कुल न चलें
- खुले जूते पहनें या ऐसी चप्पलें पहनें, जो आसानी से सूख जाएं।
- हफ्ते में एक दिन जूतों को कुछ देर धूप में रखें, जिससे उसमें मौजूद बैक्टीरिया खत्म हो जाए।


स्किन और बालों का रखें ध्यान



बारिश के मौसम में स्किन को हेल्दी रखने के लिए दिन में दो बार साबुन लगाकर नहाएं। एक-दूसरे के तौलिए और कपड़ों का प्रयोग न करें। स्किन पर पसीना न ठहरने दें। इसे किसी साफ कपड़े से पोंछते रहें। नहीं तो फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए डियोड्रेंट या पाउडर यूज करें। बारिश के मौसम में बाल भी ज्यादा गिरते हैं इसलिए माइल्ड शैंपू यूज करें। अगर बालों में डैंड्रफ है, तो ऐंटी डैंड्रफ शैंपू यूज करें लेकिन वीक में केवल एक बार। बालों की टोन को देखते हुए कोई अच्छा नैचरल कंडिशनर लगाना न भूलें।

घर को रखें क्लीन



घर के आसपास पानी न जमा होने दें। इससे मच्छर व दूसरे कीटाणु पैदा नहीं होंगे। घर को नमी से बचाने के लिए जहां लीकेज हो रहा हो, तो उसे तुरंत ठीक करवा लें। कई बार दीवारों में नमी होने से भी घर में कीड़े हो जाते हैं। घर के हर एंट्रेस गेट पर फ्लोर मैट लगाएं। इससे कीचड़ घर के अंदर नहीं आएगा। मॉनसून में किचन को स्मेल से बचाने के लिए रोजाना स्प्रे करें। किचन में चीटियां न आए, इसके लिए सिरके से दो से तीन बार वाइप करें। रात को पेस्टिसाइड्स डालें जिससे कॉकरोच घर के अंदर जगह न बना पाएं।

बारिश में ​हेल्दी डाइट है जरूरी


कड़वे और नमकीन टेस्ट वाली चीजों का सेवन अधिक करें
- चावल, छाछ, पतली दही, दूध, कद्दू, करेला, जीरा, अदरक और कच्चे प्याज का सेवन कर सकते हैं
- नींबू, आलूबुखारा, ऑरेज, आंवला, अमरूद आदि विटमिन सी से भरपूर चीजें खाएं

बारिश में क्या न खाएं


पत्तेदार सब्जियां न खाएं। इनमें सेल्यूलोज होता है, जो ठीक तरह से डाइजेस्ट नहीं हो पाता।
- स्ट्रीट फूड व फास्ट फूड।
- कटे और खुले में रखे फल।
- तेज नमक वाला खाना या खट्टी चीजें।
- फ्राइड फूड।


 
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Friday, 7 June 2019

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ये घरेलू नुस्खे देंगे मुंह के छालों से आराम

 ये घरेलू नुस्खे देंगे मुंह के छालों से आराम

आर पी पी न्यूज़ - डिजिटल डेस्क - गर्मियों में अकसर लोगों के मुंह में छाले हो जाते हैं। ठीक समय पर इनका इलाज नहीं किया जाए तो यह काफी दर्द देता है। चूंकि छाला मुंह में है इसलिए इसका दर्द हमें ठीक से खाना भी नहीं खाने देता है। दर्द में जल्द आराम न मिले तो कई लोगों को कुछ पीने में भी दिक्कत होती है। मुंह में छाला हो तो गर्म और मसालेदार चीजें खाने से परहेज करें। 
छाला बच्चों के मुंह में हो जाए तो दिक्कत और भी बढ़ जाती है क्योंकि बच्चों को ऐनर्जी के लिए समय-समय पर कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। ऐसे में जब वह छाले की वजह से खाना नहीं खा पाते हैं तो काफी मुश्किल होती है। आइए, आपको कुछ घरेलू उपाय बताते हैं जिनसे मुंह के छालों में आराम मिलेगा। 
लहसुन 
लहसुन की दो-तीन कलियां लेकर इनका पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को छाले पर लगाएं। थोड़ी देर बाद ठंडे पानी से कुल्ला कर लें। छाला जल्दी ठीक हो जाएगा। 

बर्फ 
छाले पर ठंडी चीजों से आराम मिलता है। बर्फ का टुकड़ा लें और उसे छाले पर रगड़ें। आराम मिलेगा। 

देसी घी
 
छालों को ठीक करने के लिए रात को सोने से पहले देसी घी को छाले पर लगाएं। सुबह तर छालों में आराम मिलेगा। 

शहद 
शहद भी मुंह और जीभ के छालों से राहत देने में काफी मददगार है। छालों पर रोजाना तीन-चार बार शहद लगाएं। यह छाले ठीक करने में मदद करेगा। 
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Saturday, 16 March 2019

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बदलते मौसम में इन 6 बातों का रखें खास ख्याल


आर पी पी न्यूज़ : डिजिटल डेस्क - इन दिनों मौसम तेज़ी से बदल रहा है। कभी अचानक ठंड हो जाती है तो कभी गर्मी और बारिश। ऐसे ही मौसम में ज़्यादा बैक्टीरिया और कीटाणु फैलते हैं, जो बीमारियों को न्यौता भी देते हैं। इस दौरान जोड़ों के दर्द की शिकायत भी काफी बढ़ जाती है। खासकर बुजुर्ग और उम्रदराज लोगों में। ज़रा-सी सर्दी हुई नहीं कि जोड़ों का दर्द शुरू हो जाता है। इसलिए बेहद ज़रूरी है कि बदलते मौसम के साथ कदम-ताल करते हु्ए खुद के लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करें। खान-पान बदलें, ताकि मौसम की मार आपके स्वास्थ्य पर न पड़े। 
1- सबसे पहली बात तो यह ध्यान रखें कि मौसम के स्वभाव को देखते हुए ही कपड़े पहनें। यानी ठंड है और उसके बाद अचानक गर्मी, तो गरम कपड़े ही पहनें। कपड़े ज़्यादा टाइट न पहनें नहीं तो शरीर में रैशेज पड़ सकते हैं और एलर्जी भी हो सकती है।
2- बाहर की कोई भी तली-भुनी चीज, गोलगप्पे-चाट आदि खाने से बचें। इस मौसम में इन चीजों से ही बीमार होने का सबसे ज़्यादा खतरा रहता है। 
3- कई लोग अभी से घरों में पंखा चला रहे हैं जो सेहत के लिहाज से बिल्कुल भी सही नहीं है। भले ही दोपहर को गर्मी का एहसास होता हो, लेकिन सुबह-शाम ठंड ही है और ऐसे में रात को पंखा चलाकर सोना, बीमारियों को बुलावा देने के बराबर है। 
4- कई लोग ऐसे होते हैं जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अन्य लोगों के मुकाबले कम होती है। ऐसे में उन्हें मौसम संबंधी बीमारियां जैसे कि सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार जल्दी पकड़ते हैं। ऐसे लोगों को ठंडी चीजें खाने से बचना चाहिए। उन्हें ऐसी चीजें खानी चाहिए जिनसे उनका बॉडी सिस्टम मज़बूत बने। ऐसे लोग दही, आंवला, ओट्स और विटामिन डी व सी ये भरपूर चीजें खा सकते हैं। 
5- सुबह अगर पार्क में घूमने के लिए निकले हैं या वॉक पर जा रहे हैं तो गर्म कपड़े ही पहनकर जाएं। वापस आकर तुरंत पानी न पिएं और न ही वॉक के दौरान ठंडा पानी पीने से बचें। 
6- बदलते मौसम में एलर्जी होने का भी खतरा रहता है, इसलिए अदरक, लहसुन, तुलसी और काली मिर्च जैसी चीजें खाएं। 

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