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| ददरी मेला में पशु |
आर पी पी न्यूज़ पोर्टल : बलिया ब्यूरो पवन वर्मा : महर्षि भृगु के शिष्य दर्दर मुनि के नाम पर गंगा किनारे लगने वाला ऐतिहासिक 'ददरी मेला' सजने लगा है। पशु मेला 'नंदी ग्राम' की शुरूआत तो दीपावली के दिन से ही हो गयी है लेकिन एक साल तक इंतजार के बाद जिस क्षण का इंतजार पूरे पूर्वांचल को होता है, वह मेला (मीना बाजार) 23 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा स्नान के बाद शुरू होगा। इसमें करीब सात लाख लोग गंगा में डुबकी लगाएंगे। इससे पहले 22 नवम्बर की शाम को मां गंगा की भव्य आरती होगी। मेला क्षेत्र में तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। स्नान घाट जाने वाले मार्गों को भी ठीक कराया जा रहा है।
कहा जाता है कि विष्णु को लात मारने पर महर्षि भृगु को जो श्राप मिला था, उससे मुक्ति इसी क्षेत्र में ही उन्हें मिली थी। तपस्या पूरी होने पर भृगु के शिष्य दर्दर मुनि के नेतृत्व में यज्ञ हुआ, जिसमें 88 हजार ऋषियों का यहां समागम हुआ। उसके बाद से शुरू हुई यह परम्परा समय के साथ 'लोक मेला' में तब्दील हो गयी। मेला का इंतजार जिले के उन लोगों को तो रहता ही है जो दूसरे शहर या विदेश में हैं, पूरे पूर्वांचल व बिहार के लोग भी उतनी ही बेसब्री से इसकी राह देखते हैं। इस बार यह मेला 23 नवम्बर से शुरू होगा।
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| ददरी मेला |


