गाँव से देश तक हर ख़बर पर नज़र


आप सभी पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं, आर.पी.पी न्यूज़ के 32 लाख व्यू होने पर आप सभी पाठकों को धन्यवाद। नोट:- किसी भी प्रकार के कानूनी विवाद में न्यायालय क्षेत्र महराजगंज ही होगा **************************अगर आप के आस पास किसी के साथ अन्याय हो रहा है तो चुप न रहे आवाज उठायें आपकी ख़ामोशी अपराधियों की ताकत है आज अपराध का शिकार कोई और है कल आप भी इस का शिकार हो सकते है ख़बरों के लिए या हमसे जुड़ने के लिए हमारी ईमेल पर या Whatsapp 854399183, 9198764783पर संपर्क करे *
BREAKING NEWS:

मुख्य खबरें

Tuesday, 25 December 2018

RPP NEWS

भुखमरी की कगार पर पहुंचे मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक


एक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक की पीड़ा 

  • क्या इन शिक्षकों का सुध लेने वाला कोई नहीं 
  • बगैर मानदेय के कैसे करे गुजर बसर 
  • शिक्षक शिक्षा कैसे दे जब परिवार ही भूखा रहे |  

आर पी पी न्यूज़ : ब्यूरो महराजगंज -  -अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा  संचालित 25000 मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक केंद्र सरकार की लंबी 34 महीनों यानि करीब 3 साल से वेतन न देने  से आज भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार के पास वाकई इन्हे इनका मानदेय देने के लिए फंड नहीं है या फिर किसी विशेष मानसिकता के चलते केवल उत्तर प्रदेश के 25000 मदरसा आधुनिकीकरण  शिक्षकों को रोटी से दूर किया जा रहा है।
पूरे देश में मदरसा आधुनिकीकरण के नाम पर मदरसों में करीब 50 हज़ार से भी अधिक शिक्षकों कि नियुक्ति सन् 1993 के विशेष अध्यादेश के जरिए केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। सरकार की मंशा यही रही होगी कि मदरसों में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक बच्चे न केवल धार्मिक बल्कि आधुनिक शिक्षा भी ग्रहण कर सकें। इस योजना का यह फायदा 1996 में नियुक्ति प्रक्रिया के अब करीब 22 वर्षों बाद धरातल पर यह दिखने लगा था कि मदरसा छात्र भी हिंदी अंग्रेज़ी गणित आदि की शिक्षा धार्मिक शिक्षा के साथ ग्रहण करने को लालायित नजर आने लगे हैं जिसके चलते गैर मान्यता प्राप्त मदरसा प्रबंधन भी धार्मिक से अन्यत्र शिक्षा को मदरसों में लाने लगे।
किन्तु भूखे पेट शिक्षक किस तरह छात्रों को गुणवत्तपूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकते हैं यह अपने आप में एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब सरकार को भी मालूम है लेकिन बावजूद इसके शिक्षकों का मानदेय न दिया जाना सरकार ही की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
करीब पौने दो लाख शिक्षा मित्रों की व्यथा भी कुछ इसी तरह की रही जिन्हे पहले तो राजनीतिक लाभ की गरज़ से स्कूलों में नियुक्त कर लिया गया और फिर उनके मानदेय को पहले विशिष्ट बी टी सी कराकर तनख्वाह में बदला गया और फिर कोर्ट में लचर पैरवी के तहत वापस 10 हजार रूपए पर पटक दिया गया। शिक्षा मित्रों के समायोजन के मामले में पूरी तरह एक षडयंत्र रचने की मंशा नजर आती है।
दोनों मामलों में एक बात कॉमन है कि मदरसा आधुनिकीकरण  शिक्षक हों अथवा शिक्षा मित्र इन सभी के जीवन को राजनीति ने उलझकर रख दिया है। दोनों ही मामलों में शिक्षा प्रदान कर रहे लोगों की उम्र अब उस पड़ाव को पार कर चुकी है जहां से किसी अन्य नौकरी अथवा नए जीवनयापन के साधन को खड़ा किया जा सके।
पिछले 34 महीनों से जिस शिक्षक को केवल राज्य स्तर पर 2 से 3 हजार रूपए मिल रहे हैं क्या वह शिक्षक सही मायने में अपने परिवार के साथ 2 जून की रोटी खा सकता है। क्या शिक्षक के पास इसके अलावा कोई चारा है जो सरकार ने रुपया रोकने से पहले इनके लिए इंतजाम किया हो कि जब तक आपकी तनख्वाह नहीं मिलती तब तक आप यह काम करें।
ऐसा कुछ भी नहीं है और न ही सरकार ऐसा कुछ करेगी क्योंकि जब मदरसों की बात आती है तो यह अल्पसंख्यकों से जुड़ा मामला होने के चलते केवल आश्वासन तक सीमित कर दिया जाता है जो पिछले 3 वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा कई बार किया जा चुका है। वैसे केंद्र सरकार से पैसा मंगवाकर शिक्षकों को देना राज्य सरकार की जिम्मदारी है लेकिन जवाबदेही से बचने के लिए राज्य सरकार भी केवल अपने कोटे का पैसा भुगतान कर अपना पल्ला बचाने में लगी महसूस होती है।
अल्पसंख्यक समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के सरकारी दावों को मदरसा आधुनिकीकरण योजना का यह खस्ता हाल खुद आईना दिखता है।

RPP NEWS

About RPP NEWS -

आर.पी.पी. न्यूज़ एक वेब और मोबाइल आधारित न्यूज़ नेटवर्क है| नागरिक पत्रकारिता और हमारे पाठकों की राय और विचारों पर जोर और बढ़ावा देने की दृष्टी से ही स्थापित किया गया है| हम देश भर में हो रही सभी घटनाओं पर एक ताज़ा दृष्टीकोण लाने की कोशिश कर रहे हैं |

Subscribe to this Blog via Email :