एक ऐसे अध्यापक भी ,जिनकी तारीफ जितनी भी की जाय वह कम ही होगा ।इनके द्वारा की गयी सभी गतिविधियां हम सभी लोगों के लिए अनुकरणीय हैं।
आर पी पी न्यूज़: ब्यूरो महराजगंज -आपको बतादे कि श्री शिवशंकर मौर्य सेवा निवृत्त शिक्षक है और इनका जन्म 20 जनवरी 1940 को ग्राम सेमरा राजा टोला जौनपुर गोरखपुर में हुआ ,इनके पिता श्री झकरी मौर्य थे ।शिक्षक शिव शंकर मौर्य जब अपने मां के गर्भ में थे तभी इनके पिता झकरी मौर्य आजादी की लड़ाई के लिए सुभाष चन्द्र बोस जी के आजाद हिन्द फौज में भर्ती हो गये और जब झकरी मौर्य वापस घर आए तो अपने असलहे के साथ आए । इस बीच अथक परिश्रम कर शिव शंकर मौर्य शिक्षक बन चुके थे । अतएव इन्होंने उस असलहे को गोरखपुर मालखाने में जमा कर आए । शिव शंकर मौर्य की प्रारम्भिक शिक्षा ,सेमरा राजा ,भिटौली बाजार व उच्च शिक्षा विश्वविद्यालय गोरखपुर से अग्रेजी विषय से मास्टर डिग्री ली । इनकी प्रथम नियुक्ति 20 फरवरी सन् 1962 को हुई। सेमरा ,रुदलापुर ,चौमुखा ,हरपुर महन्थ ,उनवल विन्दवलिया ,विशुनपुरा से शिक्षण कार्य करते हुए सन् 2000 में सेवा से मुक्त हुए सेवा मुक्ति के बाद इनकी मुलाकात शिक्षक प्रमोद कुमार पटेल से हुई , पटेल से बात चीत करते हुए , मौर्य जी ने कहा की बाबू हम सेवा कार्य करते हुए ढेर सारे पुस्तकों को लिखा जिसका प्रकाशन हमने अपने भविष्य निधि में मिले पैसे से प्रेस लगाया व प्रकाशन किया ,इनकी रचनाओं में मेरा देश मेरा भारत नामक महाकाव्य ,हम त पुजारी तोहरे मन्दिर क ,संविधान एक खोज ,नारी एक खोज चांद धरती का , सिक्का सोने आदिनाम की रही शिक्षक मौर्य ने मुरली मनोहर जोशी जी को भी पुस्तकें भेंट की हैं इन्होंने जोशी जी को चैता सुनाया --पल केतनि टारि सकौ सजनी ,दिन बितत जात रहौ बरसौं । उन मादन मारि सम्हारि सकै ,घातन लेप करि कर सों ,सोई छाई रहो बदरा चैता डर लागि रहि निकलि घर सों ,जो शिव शंकर होत घरा हमहूँ उन संग कढ़ावत सरसों ।। सेवामुक्त शिक्षक मौर्य अब भी सन् 2007 से पूर्व माध्यमिक विद्यालय जड़ार क्षेत्र पनियरा महराजगंज में निःशुल्क नियमित बच्चों को अपना ज्ञान बांट रहें हैं ।
आर पी पी न्यूज़: ब्यूरो महराजगंज -आपको बतादे कि श्री शिवशंकर मौर्य सेवा निवृत्त शिक्षक है और इनका जन्म 20 जनवरी 1940 को ग्राम सेमरा राजा टोला जौनपुर गोरखपुर में हुआ ,इनके पिता श्री झकरी मौर्य थे ।शिक्षक शिव शंकर मौर्य जब अपने मां के गर्भ में थे तभी इनके पिता झकरी मौर्य आजादी की लड़ाई के लिए सुभाष चन्द्र बोस जी के आजाद हिन्द फौज में भर्ती हो गये और जब झकरी मौर्य वापस घर आए तो अपने असलहे के साथ आए । इस बीच अथक परिश्रम कर शिव शंकर मौर्य शिक्षक बन चुके थे । अतएव इन्होंने उस असलहे को गोरखपुर मालखाने में जमा कर आए । शिव शंकर मौर्य की प्रारम्भिक शिक्षा ,सेमरा राजा ,भिटौली बाजार व उच्च शिक्षा विश्वविद्यालय गोरखपुर से अग्रेजी विषय से मास्टर डिग्री ली । इनकी प्रथम नियुक्ति 20 फरवरी सन् 1962 को हुई। सेमरा ,रुदलापुर ,चौमुखा ,हरपुर महन्थ ,उनवल विन्दवलिया ,विशुनपुरा से शिक्षण कार्य करते हुए सन् 2000 में सेवा से मुक्त हुए सेवा मुक्ति के बाद इनकी मुलाकात शिक्षक प्रमोद कुमार पटेल से हुई , पटेल से बात चीत करते हुए , मौर्य जी ने कहा की बाबू हम सेवा कार्य करते हुए ढेर सारे पुस्तकों को लिखा जिसका प्रकाशन हमने अपने भविष्य निधि में मिले पैसे से प्रेस लगाया व प्रकाशन किया ,इनकी रचनाओं में मेरा देश मेरा भारत नामक महाकाव्य ,हम त पुजारी तोहरे मन्दिर क ,संविधान एक खोज ,नारी एक खोज चांद धरती का , सिक्का सोने आदिनाम की रही शिक्षक मौर्य ने मुरली मनोहर जोशी जी को भी पुस्तकें भेंट की हैं इन्होंने जोशी जी को चैता सुनाया --पल केतनि टारि सकौ सजनी ,दिन बितत जात रहौ बरसौं । उन मादन मारि सम्हारि सकै ,घातन लेप करि कर सों ,सोई छाई रहो बदरा चैता डर लागि रहि निकलि घर सों ,जो शिव शंकर होत घरा हमहूँ उन संग कढ़ावत सरसों ।। सेवामुक्त शिक्षक मौर्य अब भी सन् 2007 से पूर्व माध्यमिक विद्यालय जड़ार क्षेत्र पनियरा महराजगंज में निःशुल्क नियमित बच्चों को अपना ज्ञान बांट रहें हैं ।

