धान तौल को लेकर किसान परीशान, साहूकार मालामाल, अफसरान मौन
आर.पी.पी न्यूज़:महराजगंज(परतावल)
इस समय क्षेत्र के किसान धान की फसल काटने के बाद रबी की बोआई करके अब धान बेचने के लिए परीशान हैं ,कहने के लिए तो सरकारी धान क्रय केंद्र काफी संख्या में खुले होने का ढिढोरा पिटा जा रहा है परन्तु धरातल पर मामला ही अलग है किसान अपना धान औने पौने दाम पर साहूकारों के हाथों बेचने को बाध्य हैं,सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों को धान तौलवान आसमान से तारे तोड़ने के बराबर है इन केंद्रों पर तैनात कर्मी किसानों को विभिन्न प्रकार का पहाड़ा पढ़ाते है की आप का धान गीला है,धान में खर पतवार हैं ,डंठलहै, इस कारण कटौती होगी, बोरा नही है,पैसा एक महीना बाद मिलेगा,चेक खत्म हो गया है कल आइए,किसान इन तमाम झमेलों से आज़िज़ आकर साहूकारों के हाथों धान बेच कर अपना काम चलाने को बेबस होता जा रहा है,यह साहूकार इसी का नाजायज़ लाभ लेकर किसानों का धान 1150 रुपये से लेकर 12450रुपये कुंतल तक लेकर अपना लम्बा स्टाक कर रहे हैं ,कहने के लिए तो किसान के धान का समर्थन मूल्य 2019,20 के लिए 1850 रुपये प्रति कुंतल रखा गया है परन्तु इस का लाभ किसानों को बहुत ही कम मिलता है इस का सीधा लाभ बनिया,सेठ साहूकार और सरकारी क्रय केंद्रों पर तैनात कर्मी व अधिकारी ही उठाते हैं,
कई साहूकारों ने दबी ज़बान बताया कि वह इस समय अपने पास धान का बम्पर स्टाक कर रहे हैं जब किसान के घरों का धान उंनके पास आजायेगा तब वह अपने स्टाक को सरकारी कार्य केंद्रों पर कुछ कमीशन के साथ सरकारी निर्धारित समर्थन मूल्य पर तौल करा देंगे,कुल मिला कर सरकारी धान क्रय केंद्रों का लाभ किसानों को न मिल कर सेठ साहूकारों को ही मिलता है,और वहां तैनात कर्मी भरपूर कमीशन लेकर अपनी जेब भरते हैं। किसान अपने धान को लेकर काफी मुश्किल में है लागत मूल्य बढ़ता जा रहा है परन्तु उसे वजिब दाम न मिल कर उस का उत्पीड़न हो रहा है खुले आम 1850 मूल्य के सापेक्ष 1250 दाम मिल रहा है परन्तु सभी मौन और मुखदर्शक बने हैं।अन्नदाता अपनी पीड़ा कहे तो किस से कोई सुनने वाला नही।
कई साहूकारों ने दबी ज़बान बताया कि वह इस समय अपने पास धान का बम्पर स्टाक कर रहे हैं जब किसान के घरों का धान उंनके पास आजायेगा तब वह अपने स्टाक को सरकारी कार्य केंद्रों पर कुछ कमीशन के साथ सरकारी निर्धारित समर्थन मूल्य पर तौल करा देंगे,कुल मिला कर सरकारी धान क्रय केंद्रों का लाभ किसानों को न मिल कर सेठ साहूकारों को ही मिलता है,और वहां तैनात कर्मी भरपूर कमीशन लेकर अपनी जेब भरते हैं। किसान अपने धान को लेकर काफी मुश्किल में है लागत मूल्य बढ़ता जा रहा है परन्तु उसे वजिब दाम न मिल कर उस का उत्पीड़न हो रहा है खुले आम 1850 मूल्य के सापेक्ष 1250 दाम मिल रहा है परन्तु सभी मौन और मुखदर्शक बने हैं।अन्नदाता अपनी पीड़ा कहे तो किस से कोई सुनने वाला नही।


