
रमज़ान का महीना बड़ा बरकतों का है,ईद में गरीबों का भी रखें ख्याल,
रमज़ान का महीना बड़ा बरकतों का है,ईद में गरीबों का भी रखें ख्याल,
आर पी पी न्यूज़ - वरिष्ठ सवांददाता रिज़वानुल्लाह खान की कलम से ईद पर विशेष ,खास पैगाम - अल्लाह पाक का बेपनाह एहसान है कि उसने हमें माहे रमजान जैसी नेमत से नवाजा | रमजान के फौजान का क्या कहना है की उसकी हर घड़ी रहमत भरी है | रमजान में हर नेकी का सबाब 70 गुना ज्यादा हो जाता है | ये पूरा महिना रहमत व् मगफेरत का महिना है | इस महीने में मगफेरत व् बक्शीश की हवाये चलती है और नसीमे शहर की तरह दिल और जान को पाक व् साफ बनाती है आम महीनो के मुकाबले इस महीने में अल्लाह का खास फौजान होता है इस महीने के सदके में रोजी में कुशादगी, ईमान में ताजगी व् इस्लामी अकायेद में पोख्तगी पैदा होती है |
यह बातें आर पी न्यूज़ से खास मुलाक़ात में एक नन्हा रोज़ेदार ,गरीबों से मोहब्बत करने वाले,रोज़ा नमाज़ के पाबन्द अमन बाबू पुत्र मुर्तज़ा हुसैन रिंकू भाई परतावल ने कहा,उन्होंने कहा कि
हदीस शरीफ में इस महीने के बेशुमार फजाएल है , रमजान की अहमियत का अन्दाजा इस हदीसे कुदसी से लगाया जा सकता है | की अगर मुझे अपनी उम्मत को जहन्नम में जलाना ही होता तो रमजान का महिना कभी न बनाता |
एक दूसरी हदीश में है अगर बन्दों को मालूम होता की रमजान क्या है तो मेरी उम्मत तमन्ना करती की काश पूरा साल रमजान ही होता | उसके अलावा रमजान का महिना सब्र व् शुक्र का है गोया की रमजान के जरिये इन्सानी नक्स को काबू में रखा जाता है | एक महीने के इबादतों रेयाजत से दम तोड़ के नक्से मुत्मइन्ना बन जाती है | मर्द मोमिन गुनाहों से बच कर इबादत और रेयाजत, खैफे इलाही और ताअते रसूल का आदि बन जाता है और उसके जरिये अल्लाह के करीब हो जाता है
अफ़सोस रमजान का महिना अपनी पूरी अजमतो और बरकतों के साथ धीरे – धीरे हम से रुखसत होता जा रहा है एक मोमिन का दिल उन घड़ियों की आमद पर जितना खुश था अब उसकी जुदाई में उससे कही ज्यादा दुखी है इस लिए हर मुसलमान को इस महीने की कद्र करनी चाहिये और ज्यादा से ज्यादा इबादत में गुजारनी चाहिए
अमन ने कहा कि बस ईद आ रही है हम सब खुशी मनाएंगे अच्छे कपड़े बनवाएंगे लज़ीज़ खानों का इन्तज़ाज़ घरों पर करेंगे,मगर हमारी सच्ची ईद तभी होगी जब हम अपने आस पास पड़ोस में बसने वाले यतीमों गरीबो को भी अपनी ख़ुशी में शामिल करें ,उन को भी ईद के लिए नए कपड़े खरीद कर दें उन के बहरों में ईद के सामान भेजवाकर ईद की तैयारी का अवसर दें यही हमारी सच्ची ईद होदी ,अगर हमारे पड़ोस में रहने वाला कोई गरीब यतीम ईद के दिन नए जोड़े न होने की वजह से रोता दिखा तो हम सब की ईद फीकी होगी ,
आर पी पी न्यूज़ - वरिष्ठ सवांददाता रिज़वानुल्लाह खान की कलम से ईद पर विशेष ,खास पैगाम - अल्लाह पाक का बेपनाह एहसान है कि उसने हमें माहे रमजान जैसी नेमत से नवाजा | रमजान के फौजान का क्या कहना है की उसकी हर घड़ी रहमत भरी है | रमजान में हर नेकी का सबाब 70 गुना ज्यादा हो जाता है | ये पूरा महिना रहमत व् मगफेरत का महिना है | इस महीने में मगफेरत व् बक्शीश की हवाये चलती है और नसीमे शहर की तरह दिल और जान को पाक व् साफ बनाती है आम महीनो के मुकाबले इस महीने में अल्लाह का खास फौजान होता है इस महीने के सदके में रोजी में कुशादगी, ईमान में ताजगी व् इस्लामी अकायेद में पोख्तगी पैदा होती है |
यह बातें आर पी न्यूज़ से खास मुलाक़ात में एक नन्हा रोज़ेदार ,गरीबों से मोहब्बत करने वाले,रोज़ा नमाज़ के पाबन्द अमन बाबू पुत्र मुर्तज़ा हुसैन रिंकू भाई परतावल ने कहा,उन्होंने कहा कि
हदीस शरीफ में इस महीने के बेशुमार फजाएल है , रमजान की अहमियत का अन्दाजा इस हदीसे कुदसी से लगाया जा सकता है | की अगर मुझे अपनी उम्मत को जहन्नम में जलाना ही होता तो रमजान का महिना कभी न बनाता |
एक दूसरी हदीश में है अगर बन्दों को मालूम होता की रमजान क्या है तो मेरी उम्मत तमन्ना करती की काश पूरा साल रमजान ही होता | उसके अलावा रमजान का महिना सब्र व् शुक्र का है गोया की रमजान के जरिये इन्सानी नक्स को काबू में रखा जाता है | एक महीने के इबादतों रेयाजत से दम तोड़ के नक्से मुत्मइन्ना बन जाती है | मर्द मोमिन गुनाहों से बच कर इबादत और रेयाजत, खैफे इलाही और ताअते रसूल का आदि बन जाता है और उसके जरिये अल्लाह के करीब हो जाता है
अफ़सोस रमजान का महिना अपनी पूरी अजमतो और बरकतों के साथ धीरे – धीरे हम से रुखसत होता जा रहा है एक मोमिन का दिल उन घड़ियों की आमद पर जितना खुश था अब उसकी जुदाई में उससे कही ज्यादा दुखी है इस लिए हर मुसलमान को इस महीने की कद्र करनी चाहिये और ज्यादा से ज्यादा इबादत में गुजारनी चाहिए
अमन ने कहा कि बस ईद आ रही है हम सब खुशी मनाएंगे अच्छे कपड़े बनवाएंगे लज़ीज़ खानों का इन्तज़ाज़ घरों पर करेंगे,मगर हमारी सच्ची ईद तभी होगी जब हम अपने आस पास पड़ोस में बसने वाले यतीमों गरीबो को भी अपनी ख़ुशी में शामिल करें ,उन को भी ईद के लिए नए कपड़े खरीद कर दें उन के बहरों में ईद के सामान भेजवाकर ईद की तैयारी का अवसर दें यही हमारी सच्ची ईद होदी ,अगर हमारे पड़ोस में रहने वाला कोई गरीब यतीम ईद के दिन नए जोड़े न होने की वजह से रोता दिखा तो हम सब की ईद फीकी होगी ,




