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Monday, 3 June 2019

RPP NEWS

रमज़ान का महीना बड़ा बरकतों का है,ईद में गरीबों का भी रखें ख्याल,

मज़ान का महीना बड़ा बरकतों का है,ईद में गरीबों का भी रखें ख्याल,

आर पी पी न्यूज़ - वरिष्ठ सवांददाता रिज़वानुल्लाह खान  की कलम से ईद पर विशेष ,खास पैगाम -   अल्लाह पाक का बेपनाह एहसान है कि उसने हमें माहे रमजान जैसी नेमत से नवाजा | रमजान के फौजान का क्या कहना है की उसकी हर घड़ी रहमत भरी है | रमजान में हर नेकी का सबाब 70 गुना ज्यादा हो जाता है | ये पूरा महिना रहमत व् मगफेरत का महिना है | इस महीने में मगफेरत व् बक्शीश की हवाये चलती है और नसीमे शहर की तरह दिल और जान को पाक व् साफ बनाती है  आम महीनो के मुकाबले इस महीने में अल्लाह का खास फौजान होता है इस महीने के सदके में रोजी में  कुशादगी, ईमान में ताजगी व् इस्लामी अकायेद में पोख्तगी पैदा होती है |
यह बातें आर पी न्यूज़ से खास मुलाक़ात में एक नन्हा रोज़ेदार ,गरीबों से मोहब्बत करने वाले,रोज़ा नमाज़ के पाबन्द अमन बाबू पुत्र मुर्तज़ा हुसैन रिंकू भाई परतावल ने कहा,उन्होंने कहा कि
हदीस शरीफ में इस महीने के बेशुमार फजाएल है , रमजान की अहमियत का अन्दाजा इस हदीसे कुदसी से लगाया जा सकता है | की अगर मुझे अपनी उम्मत को जहन्नम में जलाना ही होता तो रमजान का महिना कभी न बनाता |
  एक दूसरी हदीश में है  अगर बन्दों को मालूम होता की रमजान क्या है तो मेरी उम्मत तमन्ना करती की काश पूरा साल रमजान ही होता | उसके अलावा रमजान का महिना सब्र व् शुक्र का है गोया की रमजान के जरिये इन्सानी नक्स को काबू में रखा जाता है | एक महीने के इबादतों रेयाजत से दम तोड़ के नक्से मुत्मइन्ना बन जाती है | मर्द मोमिन गुनाहों से बच कर इबादत और रेयाजत, खैफे इलाही और ताअते रसूल का आदि बन जाता है और उसके जरिये अल्लाह के करीब हो जाता है
अफ़सोस रमजान का महिना अपनी पूरी अजमतो और बरकतों के साथ धीरे – धीरे हम से रुखसत होता जा रहा है एक मोमिन का दिल उन घड़ियों की आमद पर जितना खुश था अब उसकी जुदाई में उससे कही ज्यादा दुखी है इस लिए हर मुसलमान को इस महीने की कद्र करनी चाहिये और ज्यादा से ज्यादा इबादत में गुजारनी चाहिए
अमन ने कहा कि बस ईद आ रही है हम सब खुशी मनाएंगे अच्छे कपड़े बनवाएंगे लज़ीज़ खानों का इन्तज़ाज़ घरों पर करेंगे,मगर हमारी सच्ची ईद तभी होगी जब हम अपने आस पास पड़ोस में बसने वाले यतीमों गरीबो को भी अपनी ख़ुशी में शामिल करें ,उन को भी ईद के लिए नए कपड़े खरीद कर दें उन के बहरों में ईद के सामान भेजवाकर ईद की तैयारी का अवसर दें यही हमारी सच्ची ईद होदी ,अगर हमारे पड़ोस में रहने वाला कोई गरीब यतीम ईद के दिन नए जोड़े न होने की वजह से रोता दिखा तो हम सब की ईद फीकी होगी ,

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RPP NEWS

सुहाग की सलामती के लिए महिलाओं का वट सावित्री व्रत आज

सुहाग की सलामती के लिए महिलाओं का  वट सावित्री व्रत आज,करेंगीं बरगद के पेड़ की पूजा-अर्चना। 

आर.पी.पी न्यूज़:(आस्था) -सुहाग की सलामती के लिए महिलाएं ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर सोमवार को वट सावित्री व्रत करेंगी। बरगद के पेड़ की पूजा-अर्चना कर कच्चा धागा बांध उसकी परिक्रमा करेंगी। इस बार वट सावित्री में सोमवती अमावस्या का संयोग बनने से यह बेहद खास रहेगा। मान्यता के अनुसार वट सावित्री व्रत करने वाली स्त्री के पति पर आने वाल हर संकट दूर हो जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन सावित्री अपने पति सत्यभामा के प्राण को यमराज के यहां से वापस ले आई थी। इसलिए उन्हें सती सावित्री कहा जाता है। सुहागन महिलाएं सुबह में स्नान कर सोलह शृंगार करें। वट वृक्ष के नीचे सफाई कर सत्यवान और सावित्री की मूर्ति स्थापित करें। धूप, दीप, रोली, भिगोए चने, सिंदूर आदि से पूजन करें और कथा का पाठ कर आशीर्वाद मांगें। उधर, व्रत को लेकर महिलाओं ने कपड़े से बने सावित्री, सत्यवान का जोड़ा, पंखा व पूजन सामग्री की खरीदारी की। सावित्री जोड़ा 40रु, पंखा 25 रु तो डलिया 25 रुपये में बिका। परतावाल मार्केट में खरीदारी करने पहुंची लीलावती, सावित्री व सुमन देवी ने बताया कि यह व्रत बेहद खास मायने रखता है। सुहाग की सलामती के आगे महंगाई की परवाह नहीं करना है।
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Tuesday, 28 May 2019

RPP NEWS

जानिए,केदारनाथ में शिवलिंग के बजाए क्यों की जाती है भैंसे के पिछले हिस्से की पूजा..रोचक है इसकी कहानी



 आर.पी.पी न्यूज़:(आस्था) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनाव के अंतिम पड़ाव में केदारनाथ यात्रा और उनकी जीत तथा अभी हाल ही में रिलीज़ हुयी फिल्म ‘केदारनाथ’ केदारनाथ के महत्व के बारे में बहुत कुछ कहता है तो वहीं जून 2013 में आई केदारनाथ त्रासदी की भयावह यादों को भी ताजा कर दिया है। भगवान शिव का वह पवित्र स्थल जिसके दर्शन मात्र से ही सारी समस्याओं का हल जो जाता है, जो हिन्दू धर्म मे मनुष्य के लिए मोक्ष का द्वार माना जाता है, वह केदारनाथ 2013 में आई भ’यानक त्रासदी से अस्त-व्यस्त हो गया था। लगातार तीन दिन हुयी बारिश और बादल भटने की वजह से मन्दाकिनी नदी में ऐसा प्रलय आया जिसने हजारों लोगों को मौ’त की नींद सुला दिया। कई लापता हो गये तो कई अपने परिवार से बिछड़ गये।प्रलय इतना भयंकर था कि लगभग एक महीने तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी कई लोगों का नामोनिशान तक नहीं मिला और आखिरकार उन्हें लापता ही घोषित कर दिया गया। गौरतलब है कि उसी केदारनाथ त्रासदी में कुछ परिवर्तन करके निर्देशक अभिषेक कपूर ने एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म का निर्माण किया है जिसमें फिल्म के नायक को फिल्म की नायिका से प्यार हो जाता है लेकिन नायक के मुस्लिम होने के कारण नायिका के परिवार वाले उन दोनों का रिश्ता स्वीकार नहीं करते जिसके चलते क्रोध में आकर नायिका केदारनाथ में प्रलय आने की प्राथना कर बैठती है। फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत के साथ सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान ने डेब्यू किया है।
लोगों ने भले ही केदारनाथ पर दर्शायी गयी फिल्म को लव-जिहाद का मुद्दा बनाकर उसकी आलोचना की हो पर बॉक्स ऑफिस पर फिल्म लगातार कमाई कर रही है। फिल्म देखकर आप केदारनाथ में आई त्रासदी का अंदाजा जरूर लगा सकते हैं लेकिन उसके वर्चस्व की जड़ें इतिहास में बहुत अन्दर तक गयी हुयी हैं।

इतिहास से जुड़ा है केदारनाथ का अस्तित्व-
उत्तराखंड का सबसे बड़ा शिव मंदिर हिमालय की केदार नामक चोटी पर बना हुआ है। देश में मौजूद बारह ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च और चार धामों में से एक केदारनाथ धाम तीन दिशाओं से पहाड़ों से घिरा हुआ है। इसके एक तरफ है 22 हज़ार फुट ऊँचा केदारनाथ, दूसरी तरफ भरतकुंड और तीसरी तरफ है 21 हज़ार 600 फुट ऊँचा खुर्चकुंड। पत्थरों के बड़े-बड़े शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया यह शिव मंदिर लगभग 6 फुट ऊँचे चबूतरे पर बना हुआ है।
मंदिर निर्माण के इतिहास को लेकर आज तक कोई पुख्ता सबूत तो नहीं मिले हैं हालाँकि कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि मालवा के महान राजा भोज द्वारा करवाए गये अनेक मंदिर निर्माणों में से केदारनाथ मंदिर भी एक ऐसा मंदिर है जिसका 10वीं शताब्दी के आस-पास पुनर्निर्माण कराया गया था। कुछ का कहना है कि इसका निर्माण 8वीं शताब्दी में शंकराचार्य द्वारा किया गया था।

पहाड़ों के साथ-साथ केदारनाथ में मन्दाकिनी, सरस्वती, मधुगंगा, क्षीरगंगा और स्वर्णगौरी नामक पाँच नदियों का भी संगम है। पुराण के अनुसार यह है मंदिर निर्माण की कथा- कथानुसार हिमालय के केदार श्रृंग पर भगवान विष्णु के अवतार महातपस्वी नर और नारायण ऋषि तपास्य करते थे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वर प्रदान किया।
एक और कथा कुछ इस प्रकार है कि महाभारत का युद्ध जीतने के बाद पांडवों ने भ्रातह’त्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भागवान शिव का आशीर्वाद लेना चाहा। लेकिन भगवान शिव उनसे नाराज होकर केदार में जाकर अंतर्ध्यान में लग गये। पांडव जब उनका पीछा करते हुए केदार पहुंचे तो शिव ने एक भैंसे का रूप धारण कर लिया और बाकी पशुओं में जाकर मिल गये। भीम ने अपना विशाल रूप धारण करके दो पहाड़ों पर जब अपने पैर फैलाए तो अन्य जानवर तो उनके नीचे से निकल गये परन्तु भगवान् शिव को यह रास नहीं आया। भीम जैसे ही शिव-रुपी भैंसे पर झपटे वह भूमि में अंतर्ध्यान होने लगा। भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ के भाग को पकड़ लिया। भगवान् शिव ने उनके समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और उन्हें उनके पाप से मुक्त कर दिया। तब से केदारनाथ में भगवान शंकर को भैंस की पीठ की पिंड के रूप में पूजा जाता है।
दीपवाली पर्व के दूसरे दिन मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं जो कि छः माह तक बंद रहते हैं। छः महीने बाद मई के महीने में कपाट फिर से खुलते हैं और केदारनाथ यात्रा आरम्भ होती है।
 राजन पटेल कि कलम से
 आर.पी.पी न्यूज़ एडिटर, महराजगंज,उत्तर प्रदेश
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