राजन पटेल का रिपोर्ट
आर.पी.पी न्यूज़ पोर्टल : आपने साईकिल बस से तो स्कूल जाते बच्चो को जरुर देखा होगा लेकिन आज स्कूल जाते बच्चों की कुछ ऐसी
ही तस्वीरें सामने आईं हैं जो हमें डिजिटल इंडिया और बूलेट ट्रेन जैसे सेवाओं के सपनों को हकिकत लाने के लिए सोचने भर पर शर्म आने लगेगी आज असम के बिश्वनाथ जिले से जहां बच्चे शिक्षा के लिए हर
दिन जान जोखिम में डाल रहे हैं। वहीँ इन नौव निहालो की कोई परवाह नही है, स्कूल जाने वाले बच्चों की जो तस्वीर
सामने आई है, वह न सिर्फ हैरान करने वाली हैं, बल्कि देश की शिक्षा
व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर रही हैं। बिश्वनाथ जिले के बच्चे हर दिन जान जोखिम
में डाल कर स्कूल जाते हैं।
यहां के बच्चे अपने शिक्षा के अधिकार को पाने के लिए हर दिन नदी को तैर कर
स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं। बच्चे नदी को पार करने के लिए पतीला का उपयोग
कर रहे हैं। बच्चे अपने घरों से एल्यूमीनियम का बड़ा पतीला साथ लाते हैं
और उसमें बैठकर नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि पतीले में बैठकर नदी पार करने वाले बच्चों की
संख्या कोई एक दो नहीं बल्कि पूरी चालीस है। प्रशासन पर इस बात और बच्चों
की सुरक्षा को लेकर जूं तक नहीं रेंग रही है। सबका साथ और सबका विकास करने वाली सरकारों को इसे देखना चाहिए की आज देश का भविष्य ही पतीला से चल रहा है क्या बात है साहब ये बच्चे प्राइमरी स्कूल में
पढ़ते हैं और उस स्कूल में एक ही शिक्षक हैं और यही शिक्षक इन बच्चों को नदी
पार करवाने में मदद भी करते हैं। असम के सूतिया गांव के यह बच्चे न केवल हर
दिन किताब लेकर स्कूल जाते हैं बल्कि वह अपने साथ एक बड़ा सा बर्तन भी साथ
ले जाते हैं। बच्चे इसी बड़े बर्तन में बैठकर नदी को पार करते हैं स्कूल
जाते हैं और फिर वापस भी आते हैं। एक ओर जहां देशभर की सड़कों को जोड़ने के
लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना चलाई जा रही है वहीं दूसरी तरफ एक गांव के
बच्चों को स्कूल जाने के लिए सड़क तो छोड़िए पगडंडी तक मौजूद नहीं है।
पतीले में बैठकर नदी पार करने वाले बच्चों का एक वीडियो वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें देखा जा सकता है कि कैसे बच्चे न सिर्फ पतीले में बैठकर नदी पार कर रहे हैं बल्कि उनके साथ किताबों से भरा स्कूल बैग भी है।
बच्चे पहले नदी के किनारे पतीले को आधा पानी और आधा जमीन पर रखते हैं, फिर उसमें किताबों का बैग रखते हैं और हाथों के सहारे नदी में उतर जाते हैं। फिर धीरे-धीरे हाथ से नदी के पानी को काटते हुए आगे बढ़ते हैं और स्कूल पहुंचते हैं। इन बच्चों में लड़के और लड़कियां दोनों होते हैं। चौंकाने वाली बता यह है कि इससे पहले इस स्कूल के बच्चे केले के थम (पेड़) के सहारे नदी पार करते थे। आखिर क्यों नही दिखाई देता ये साहब जी लोगों को ? जब देश के पढ़ने वाले बच्चों का ही ये हाल है तो मेक इन इंडिया क्या जापान बनाएगा क्या ? क्या इन बच्चो पर दया नही आती आपको ? क्या ऐसे बन जायेगा भारत विश्व गुरु ? नही साहब अभी बहुत सुधार करना बाकी है जमीनी हकीक़त कुछ और ही होती है ।
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| पतीले में बैठ नदी पार करतें बच्चे |
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| नदी पार करतें बच्चे |
पतीले में बैठकर नदी पार करने वाले बच्चों का एक वीडियो वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें देखा जा सकता है कि कैसे बच्चे न सिर्फ पतीले में बैठकर नदी पार कर रहे हैं बल्कि उनके साथ किताबों से भरा स्कूल बैग भी है।
बच्चे पहले नदी के किनारे पतीले को आधा पानी और आधा जमीन पर रखते हैं, फिर उसमें किताबों का बैग रखते हैं और हाथों के सहारे नदी में उतर जाते हैं। फिर धीरे-धीरे हाथ से नदी के पानी को काटते हुए आगे बढ़ते हैं और स्कूल पहुंचते हैं। इन बच्चों में लड़के और लड़कियां दोनों होते हैं। चौंकाने वाली बता यह है कि इससे पहले इस स्कूल के बच्चे केले के थम (पेड़) के सहारे नदी पार करते थे। आखिर क्यों नही दिखाई देता ये साहब जी लोगों को ? जब देश के पढ़ने वाले बच्चों का ही ये हाल है तो मेक इन इंडिया क्या जापान बनाएगा क्या ? क्या इन बच्चो पर दया नही आती आपको ? क्या ऐसे बन जायेगा भारत विश्व गुरु ? नही साहब अभी बहुत सुधार करना बाकी है जमीनी हकीक़त कुछ और ही होती है ।


