महराजगंज:परतावल: आज देश में भले ही गाँव- गाँव तक बिजली पहुँचाने का दावा सरकार करती हो लेकिन उस दावे में कितना सच्चाई है हम आप को दिखातें है जी ऐसा ही कुछ परतावल ब्लाक के ग्राम सभा पकड़ी दीक्षित गाँव में देखने को मिला है यहाँ के चौराहे पर आज बहुत ऐसी दुकाने आप को मिल जायेंगीं जो सोलर पैनेल लगा कर अपना कार्य कर रहीं हो लेकिन आज भी ये बिजली को तरस रहीं है यहाँ के व्यापारियों को आज तक बिजली का इंतजार करते- करते ना जाने कितने सोलर के पैनेल और बैट्री बदल कर व्यापार करना पर रहा है |
इस क्षेत्र में आने वाले दस गाँवों के बिच में यह मात्र एक चौराहा पड़ता है जहाँ से लोग अपने दिनचर्या में उपयोग होने वाले समान प्रतिदिन यहाँ से खरीदतें है बिजली न होने कारण यहाँ के दुकानदार ग्राहकों को अच्छी सेवा नही दे पातें है जिससे निरास होकर ग्रामीणों को यहाँ से लगभग पांच किलोमीटर दूर परतावल जाना पड़ता है |
चौराहे पर तक़रीबन पचीसो दुकाने होंगी जो आज बिजली के इंतजार में या तो टूटने की कगार पर आ गई है या फिर कई दुकाने ऐसे भी खुली जो बिजली न होने के अभाव में टूट गई | इस चौराहे पर के कई व्यापारियों ने तो यह भी बताया है की जब चुनाव नजदीक आता है तो ग्राम प्रधान से लेकर विधायक,सांसद तक के उम्मीदवार आतें है और हमसे इस चौराहे पर बिजली लगाने का वादा कर चुनाव जितने के बाद गायब हो जातें है इस तरह कई सरकारें आई और गई फिर भी यहाँ का बिजली संकट दूर नही हुआ और डिजिटल इण्डिया का सपना देखा जा रहा है | इस साल किसी तरह यहाँ बिजली लाने का कवायद शुरू हुई आनन् फन्नन में बिजली के खम्भे लगवाए गए व्यापारियों में बहुत उत्साह भी था बिजली के पोल पर तार भी लगा पर तार में बिजली अभी तक नही आई और आये भी तो कैसे साहब पोल पर तार लगतें समय जो एक पेड़ को खम्भे पर गिरा दिया गया था और वह खम्भा अभी तक वैसे ही राह में पड़ा है जहाँ से चौराहे पर बिजली जाती आपको बता दें की पकड़ी दीक्षित
गाँव में जाने के पूरब वाले मुख्य मार्ग पर यह बिजली का खम्भा टूट कर गिरा है जिससे गाँव में आने जाने वाले लोगो और गाड़ियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है पर जिम्मेदार मौन है पूछे जाने पर कहतें है बिजली बिभाग के कोटे में पोल नही है कोई भी संतोष जनक जबाब नहीं देता | अब सवाल ये है की क्या इस तरह डिजिटल भारत बन जायेगा क्या सरकार जो वाई -फाई गाँवों में लगा रही है उसका सही लाभ मिल पायेगा गा क्या ? या फिर चुनावों और कागजो में ही इसका महत्व रह जायेगा | सिर्फ पकड़ी दीक्षित चौराहा ही नही आज देश के तमाम गाँवों के छोटे ऐसे चौराहें है जहा के जनता को हर सुविधा तो दे सकतें है लेकिन बिजली के संकट में कुछ नही कर पातें और हम देश के गाँवों को हाई टेक करने में जुटें है| हैरत की बात तो यह है की आज तक समाज का आइना कहे जाने वाले मिडिया को भी इस चौराहे की समस्या दिखाने को अपने अख़बारों या टीवी में जगह नही मिली | जहाँ आज हर स्कूल, कॉलेजों के छात्रों को फोटो कॉपी, फोटो या अन्य ऑनलाइन सुविधाओं की जरूत होती है और यही हाल पकड़ी दीक्षित गाँव की भी है इस गाँव को शिक्षा का गाँव कहा जाता है इस गाँव में दो बी.टी.सी, दो महाविद्यालय और एक कान्वेंट स्कूल है सभी विद्यार्थियों को ऑनलाइन या की अन्य जरुरत के लिये अपने सबसे नजदीक पकड़ी दीक्षित गाँव के चौराहे पर जातें है पर उनको भी बिजली के न होने की वजह से भारी संकट का सामना करना पड़ता है और आठ,दस किमी0 दूर जाना पड़ता है | इस तरह से चौराहे पर बिजली न होने की समस्या से ग्रामीण, व्यापारी, और विद्यार्थियों को सामना करना पड़ रहा है, फिर भी जिम्मेदार मौन है क्या उन्हें दिखाई नही देता की यह एक गाँव की समस्या नही बल्की दसो गाँवों की समस्या है आज कोई आवाज़ उठाने वाला नही है लेकिन फिर भी आर.पी.पी. न्यूज़ पोर्टल इस समस्या को दिखाया है अब देखना ये है की ये बात उन तमाम ऊँचे पद पर बैठे अधिकारीयों और सरकारों तक जाती है या नही जो इसके गाँव और इस देश के विकास में बांधा बने है देखना ये भी है की इनकी नींद खुलती है या नही जो आज हर बात में बजट और कोटे की बात करतें है |
इस क्षेत्र में आने वाले दस गाँवों के बिच में यह मात्र एक चौराहा पड़ता है जहाँ से लोग अपने दिनचर्या में उपयोग होने वाले समान प्रतिदिन यहाँ से खरीदतें है बिजली न होने कारण यहाँ के दुकानदार ग्राहकों को अच्छी सेवा नही दे पातें है जिससे निरास होकर ग्रामीणों को यहाँ से लगभग पांच किलोमीटर दूर परतावल जाना पड़ता है |
चौराहे पर तक़रीबन पचीसो दुकाने होंगी जो आज बिजली के इंतजार में या तो टूटने की कगार पर आ गई है या फिर कई दुकाने ऐसे भी खुली जो बिजली न होने के अभाव में टूट गई | इस चौराहे पर के कई व्यापारियों ने तो यह भी बताया है की जब चुनाव नजदीक आता है तो ग्राम प्रधान से लेकर विधायक,सांसद तक के उम्मीदवार आतें है और हमसे इस चौराहे पर बिजली लगाने का वादा कर चुनाव जितने के बाद गायब हो जातें है इस तरह कई सरकारें आई और गई फिर भी यहाँ का बिजली संकट दूर नही हुआ और डिजिटल इण्डिया का सपना देखा जा रहा है | इस साल किसी तरह यहाँ बिजली लाने का कवायद शुरू हुई आनन् फन्नन में बिजली के खम्भे लगवाए गए व्यापारियों में बहुत उत्साह भी था बिजली के पोल पर तार भी लगा पर तार में बिजली अभी तक नही आई और आये भी तो कैसे साहब पोल पर तार लगतें समय जो एक पेड़ को खम्भे पर गिरा दिया गया था और वह खम्भा अभी तक वैसे ही राह में पड़ा है जहाँ से चौराहे पर बिजली जाती आपको बता दें की पकड़ी दीक्षित
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| चौराहे पर जाने वाले पोल का टुटा तार |
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| गाँव में जाने वाले मुख्य मार्ग पर एक महीने से गिरा बिजली बिजली का पोल |
गाँव में जाने के पूरब वाले मुख्य मार्ग पर यह बिजली का खम्भा टूट कर गिरा है जिससे गाँव में आने जाने वाले लोगो और गाड़ियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है पर जिम्मेदार मौन है पूछे जाने पर कहतें है बिजली बिभाग के कोटे में पोल नही है कोई भी संतोष जनक जबाब नहीं देता | अब सवाल ये है की क्या इस तरह डिजिटल भारत बन जायेगा क्या सरकार जो वाई -फाई गाँवों में लगा रही है उसका सही लाभ मिल पायेगा गा क्या ? या फिर चुनावों और कागजो में ही इसका महत्व रह जायेगा | सिर्फ पकड़ी दीक्षित चौराहा ही नही आज देश के तमाम गाँवों के छोटे ऐसे चौराहें है जहा के जनता को हर सुविधा तो दे सकतें है लेकिन बिजली के संकट में कुछ नही कर पातें और हम देश के गाँवों को हाई टेक करने में जुटें है| हैरत की बात तो यह है की आज तक समाज का आइना कहे जाने वाले मिडिया को भी इस चौराहे की समस्या दिखाने को अपने अख़बारों या टीवी में जगह नही मिली | जहाँ आज हर स्कूल, कॉलेजों के छात्रों को फोटो कॉपी, फोटो या अन्य ऑनलाइन सुविधाओं की जरूत होती है और यही हाल पकड़ी दीक्षित गाँव की भी है इस गाँव को शिक्षा का गाँव कहा जाता है इस गाँव में दो बी.टी.सी, दो महाविद्यालय और एक कान्वेंट स्कूल है सभी विद्यार्थियों को ऑनलाइन या की अन्य जरुरत के लिये अपने सबसे नजदीक पकड़ी दीक्षित गाँव के चौराहे पर जातें है पर उनको भी बिजली के न होने की वजह से भारी संकट का सामना करना पड़ता है और आठ,दस किमी0 दूर जाना पड़ता है | इस तरह से चौराहे पर बिजली न होने की समस्या से ग्रामीण, व्यापारी, और विद्यार्थियों को सामना करना पड़ रहा है, फिर भी जिम्मेदार मौन है क्या उन्हें दिखाई नही देता की यह एक गाँव की समस्या नही बल्की दसो गाँवों की समस्या है आज कोई आवाज़ उठाने वाला नही है लेकिन फिर भी आर.पी.पी. न्यूज़ पोर्टल इस समस्या को दिखाया है अब देखना ये है की ये बात उन तमाम ऊँचे पद पर बैठे अधिकारीयों और सरकारों तक जाती है या नही जो इसके गाँव और इस देश के विकास में बांधा बने है देखना ये भी है की इनकी नींद खुलती है या नही जो आज हर बात में बजट और कोटे की बात करतें है |


