(राजन पटेल का रिपोर्ट)
आर.पी.पी न्यूज़ पोर्टल : महराजगंज: उत्तर प्रदेश में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगने के बाद भी पॉलीथिन की बिक्री रुकी नही है खुलेआम दुकानों पर पॉलीथिन में सामानों की बिक्री हो रही है लेकिन अब जाकर प्रशासन की नींद खुली है | ऐसा ही देखने को मिला है महराजगंज के सिसवा में जब दुकानों पर पीआरडी टीम ने छापा मारा
तो पॉलीथिन में समान रख कर बिक्री करने वाले दुकानदारो के होश उड़ गए | आप को बता दें की शुक्रवार को सिसवा कस्बे में दुकानों पर अवैध रूप से पॉलीथिन प्रयोग कर रहे 8 दूकानों पर नगर
पंचायत अधिशासी अधिकारी ने छापेमारी की | इस दौरान थोक व
फूटकर दुकानों तथा खुले मे कूड़ा फेकने व पॉलीथिन प्रयोग करते पाये गये चार
किराना स्टोर की दुकानदार राजाराम 2000, बैजनाथ 200, मिथलेश2000, पप्पू 200 कान्हा वस्त्रालय
5000 मनमोहन वस्त्रालय 5000 व राजाराम सब्जी विक्रेता एव व्यवसायियों 14800
हजार आठ सौ रुपय अर्थदंड की वसूली की गयी। इस अभियान में सिसवा नगर पंचायत के ईओ आशुतोष सिंह ने शायर स्थान, लोहामंडी, फलमण्डी, सब्जी मंडी दुकानों में छापेमारी की | तथा उनको निर्देशित किया गया कि भविष्य में ऐसा न करे। जाँच के दौरान नगर पंचायत कर्मचारी कपिल देव भारती, अनिल कुमार,रामनरेश
यादव,अरुण सिंह,राकेश पाण्डे, आशिष सोनी,धीरज बरनवाल, रीना तथा पीआरडी टीम
भी मौजूद रही।
जानिए किस तरह की पॉलीथिन प्रतिबंधित है |
-चाय और पान की दुकान में पैकिंग में यूज होने वाली पन्नी
-मिठाई की दुकान में पनीर, रसगुल्ला, दही आदि की पैकिंग में यूज होने वाली पन्नी
-हर तरह के प्लास्टिक पॉलीथिन से बने कैरी बैग
-मॉल, सभी रिटेल स्टोर, जनरल स्टोर में प्रतिबंधित, ठेलों और ग्रासरी शॉप पर
यह पॉलीथिन प्रतिबंधित नहीं
- ऐसी प्लास्टिक जो पैकेजिंग का हिस्सा हो
- दूध की थैली, मट्ठा, ब्रेड, नमकीन, पाव-बन
- डिस्पोजेबल प्लास्टिक गिलास, प्लेटे और चम्मचें
- जैव चिकित्सा अपशिष्ट एक्ट 1998 (प्रबंधन व निस्तारण) के तहत अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में यूज की जाने वाली पॉलीथिन इस बैन से अलग है.
इनकी बढ़ गई डिमांड
पॉलीथिन बैग पर प्रतिबंध के बाद कागज और नॉन वीमेन से बने झोलों की डिमांड काफी बढ़ गई है. कागज के लिफाफों की वजह से रद्दी की कीमत भी काफी बढ़ गई है. 9 से 10 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकने वाली रद्दी अब 15 रुपए से ऊपर के रेट पर बिक रही है. कागज के लिफाफे बनाने वाले राम कुमार बताते हैं कि पहले लिफाफे बनाने के लिए रद्दी 10 रुपए किलो के हिसाब से मिल जाती थी, लेकिन प्लास्टिक बैन के बाद से रद्दी भी महंगी हो गई है, लेकिन लिफाफे की डिमांड अब पहले से कई गुना ज्यादा है ऐसे में महंगी रद्दी से भी काम चलाना पड़ रहा है.
इस प्रकार है जुर्माने का गणित
1- पॉलीथिन की बिक्री करते पहली बार पकड़े जाने पर - 5 हजार रुपए जुर्माना या एक महीने जेल या फिर दोनों
2- दोबारा पकड़े जाने पर - 10 हजार का जुर्माना या 6 महीने की कैद या फिर दोनों
3- पॉलीथिन कैरीबैग में कूड़ा फेंकने पर 100 रुपए जुर्माना
4- दोबारा पकड़े जाने पर 2 हजार जुर्माना या एक महीने की कैद
(जुर्माना या सजा उत्तर प्रदेश प्लास्टिक एवं जीव अनाश्रित कूड़ा-कचरा अधिनियम 2000 के तहत )
व्यापारियों में भी संशय की स्थिति
पॉलीथिन पर पाबंदी लगने के बाद कई फैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी. इससे सैकड़ों लोग बेरोजगार हो जाएंगे. बैन लगाने के बाद अब तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किस तरह की प्लास्टिक पर पूरी तरह बैन है और किस पर नहीं|
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आर.पी.पी न्यूज़ पोर्टल : महराजगंज: उत्तर प्रदेश में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगने के बाद भी पॉलीथिन की बिक्री रुकी नही है खुलेआम दुकानों पर पॉलीथिन में सामानों की बिक्री हो रही है लेकिन अब जाकर प्रशासन की नींद खुली है | ऐसा ही देखने को मिला है महराजगंज के सिसवा में जब दुकानों पर पीआरडी टीम ने छापा मारा
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| किराने की दुकानों पर पकड़ा गया पॉलीथिन |
जानिए किस तरह की पॉलीथिन प्रतिबंधित है |
-चाय और पान की दुकान में पैकिंग में यूज होने वाली पन्नी
-मिठाई की दुकान में पनीर, रसगुल्ला, दही आदि की पैकिंग में यूज होने वाली पन्नी
-हर तरह के प्लास्टिक पॉलीथिन से बने कैरी बैग
-मॉल, सभी रिटेल स्टोर, जनरल स्टोर में प्रतिबंधित, ठेलों और ग्रासरी शॉप पर
यह पॉलीथिन प्रतिबंधित नहीं
- ऐसी प्लास्टिक जो पैकेजिंग का हिस्सा हो
- दूध की थैली, मट्ठा, ब्रेड, नमकीन, पाव-बन
- डिस्पोजेबल प्लास्टिक गिलास, प्लेटे और चम्मचें
- जैव चिकित्सा अपशिष्ट एक्ट 1998 (प्रबंधन व निस्तारण) के तहत अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में यूज की जाने वाली पॉलीथिन इस बैन से अलग है.
इनकी बढ़ गई डिमांड
पॉलीथिन बैग पर प्रतिबंध के बाद कागज और नॉन वीमेन से बने झोलों की डिमांड काफी बढ़ गई है. कागज के लिफाफों की वजह से रद्दी की कीमत भी काफी बढ़ गई है. 9 से 10 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकने वाली रद्दी अब 15 रुपए से ऊपर के रेट पर बिक रही है. कागज के लिफाफे बनाने वाले राम कुमार बताते हैं कि पहले लिफाफे बनाने के लिए रद्दी 10 रुपए किलो के हिसाब से मिल जाती थी, लेकिन प्लास्टिक बैन के बाद से रद्दी भी महंगी हो गई है, लेकिन लिफाफे की डिमांड अब पहले से कई गुना ज्यादा है ऐसे में महंगी रद्दी से भी काम चलाना पड़ रहा है.
इस प्रकार है जुर्माने का गणित
1- पॉलीथिन की बिक्री करते पहली बार पकड़े जाने पर - 5 हजार रुपए जुर्माना या एक महीने जेल या फिर दोनों
2- दोबारा पकड़े जाने पर - 10 हजार का जुर्माना या 6 महीने की कैद या फिर दोनों
3- पॉलीथिन कैरीबैग में कूड़ा फेंकने पर 100 रुपए जुर्माना
4- दोबारा पकड़े जाने पर 2 हजार जुर्माना या एक महीने की कैद
(जुर्माना या सजा उत्तर प्रदेश प्लास्टिक एवं जीव अनाश्रित कूड़ा-कचरा अधिनियम 2000 के तहत )
व्यापारियों में भी संशय की स्थिति
पॉलीथिन पर पाबंदी लगने के बाद कई फैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी. इससे सैकड़ों लोग बेरोजगार हो जाएंगे. बैन लगाने के बाद अब तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किस तरह की प्लास्टिक पर पूरी तरह बैन है और किस पर नहीं|
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