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| एडिटर: राजन पटेल कि कलम से |
यह महापर्व आज से नहाय-खाय से शुरू होकर 14 नवंबर को सूर्योदय के अर्घ्य देने के साथ समाप्त होगा। छठ का महापर्व रविवार को नहाए खाए के साथ शुरू हो रहा है। इस पर्व का मुख्य प्रसाद ठेकुआ है जो आटे से बनता है वहीं खजूर आटे और मैदा दोनों से तैयार किया जाता है।
इसके लिए घरों में गेहूं चुनने व मिट्टी का चूल्हा तैयार करने का सिलसिला शुरू हो गया है। व्रतधारी पूजा सामग्री के लिए नए बर्तन और कपड़े खरीदने में मशगूल हैं। साड़ियों की दुकानों पर भी रौनक देखने को मिल रहा है। व्रती नई साड़ी पहनकर ही अस्तांचल व उदय होते सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
इन बाजारों में उमड़ रही भीड़
पूजन सामग्री के लिए महराजगंज के अम्रुतियाँ बाजार, सक्सेना चौरहा, सरोजनी नगर,नौतनवा, फरेंदा,निचलौल, परतावल चौक तथा परतावल बाजार समेत कई जगहों पर बाजार में रौनक बढ़ गई है। कोशी, पीतल का सूप, बांस का सूप, दउरा, केला, संतरा, अनार, सेब, पानी फल, गागल, पानी वाला नारियल, गन्ना, कच्ची हल्दी, मूली, अदरक, सूथनी आदि की दुकानें सजने लगी हैं। दुकाने सजने के साथ ही साथ फलों और वस्त्रों के दामों में भी चढ़ाव देखने को मिल रहा है |

