आर पी पी न्यूज़: संवाददाता अभय पासवान: महराजगंज दिनांक 3 मई दिन शुक्रवार को रात्रि 8:00 बजे ग्राम सभा गौनरिया बाबू निवासी राममहंथ यादव की शनिवार लखनऊ के वैलेंटन चौराहा स्थित एफ.आई.हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। मृतक एक गरीब परिवार से है परिवार के सभी लोग मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते है। राममहंथ 4 भाइयो में सबसे छोटा था जिसकी उम्र लगभग 32 वर्ष था ।इलाज के दौरान लगभग 5 लाख रुपये खर्च भी हो गए परिवार वालो ने खेत को बंधक रख कर,कर्ज इत्यादि लेकर किसी तरह घायल हुए राममहंथ का इलाज करवा रहे थे। परिवार के पास इस समय खाने के लिए भी कुछ नही बचा हैं इस समय एक एक पैसे के लिए परिवार के लोग मोहताज है ।ऐसे स्थिति में परिवार वालो के पास इलाज के लिए पैसे कम पड़ गए और 80000 रुपये बाकी लग गया। अस्पताल वाले गरीबी को भी नही देख सके और मृतक का पैसा बाकी होने के कारण कोई पर्ची,डेड सर्टिफिकेट इत्यादि भी नही दिया और किसी तरह परिवार वाले एम्बुलेंस से मृतक को घर लाये जब एम्बुलेंस कर्मी ने बकाया पैसा मांगा तो गावँ के लोगो ने एम्बुलेंश कर्मी से सवाल किया कि जब चोट सर में थी तो लिवर की जगह आपरेशन क्यों किया गया? इस पर एम्बुलेस कर्मी कुछ बोल न सका और मालिक से बात करने की बात कहकर कुछ दूरी पर खड़ी एम्बुलेंस लेकर फरार हो गया । इस हादसे में सबसे बड़ी लापरवाही गौनारिया बाबू स्थित हीरो,होन्डा व महिंद्रा एजेंसी का है इसमे मृतक का एक्सीडेंट एजेंसी पर खड़ी ट्रक को पीछे करते समय हुआ है ।ग्रामसभा के लोगो का कहना है कि आये दिन यहां पर खड़ी ट्रको के चलते यहाँ कभी भी हादसे होने का डर बना रहता है लेकिन एजेंसी द्वारा इस पर कोई विचार नही किया जाता है ।यहां पर गाड़ियों को उतारने के बावजूद दो-दो दिनों तक गाड़ी खड़ी रहने दी जाती है ।इन ट्रको के खड़े होने के चलते ही ग्रामसभा के राममहंथ यादव का दुर्घटना हुआ था।और दुर्घटना के चलते उसकी मृत्य हुई ।ग्राम सभा के लोगो का कहना है कि यह रोड गोरखपुर की मेन रोड है इस रोड से प्रतिदिन हजारों की संख्या में गाड़िया आती जाती रहती है अक्सर इस पर दुर्घटना होती रहती है लेकिन फिर भी एजेंसीयो द्वारा मनमाने तरीके से रोड के दोनो तरफ़ गाड़िया खड़ी करके छोड़ देते है। इस पर प्रशाशन भी ध्यान नही देती है और न ही एजेंसी ।आज मृतक राममहंथ यादव के दो छोटे-छोटे बच्चे राहुल (10वर्ष) ,प्रिंस 8 (वर्ष) अनाथ हो गये। पत्नी किस्मती देवी बिधवा व एक माँ से उसका पुत्र बिछड़ गया इसके जिम्मेदार कौन ? यदि एजेंसी पर गाड़ी नही होती तो शायद आज बच्चे अनाथ व माँ से एक बेटा नही बिछड़ता ।आज मातृ दिवस पर एक माँ से बेटा बिछड़ जाने का दुःख ,एक पत्नी से उसका पति व बच्चो के सर से पिता का छाया उठ जाने का दर्द हम सभी समझ सकते है ।इसके बावजूद भी एजेंसी वालो ने परिवार वालो का हाल तक भी जानना उचित नही समझा।अब परिवार वाले के पास सबसे बड़ी समस्या है कि इस दुख की घड़ी में पैसा न होने के कारण मृतक का क्रिया कर्म कैसे होगा । इस घटना के चलते पूरा गांव गमगीन है पत्नी,बच्चे व परिवार वालो का रो - रो कर बुरा हाल है इस को देखकर पूरा गांव शोक में डूबा है सभी की आँखें नम हो गई है।

