*सिस्टम की चूक का शिकार दिव्यांग परिवार।*
*क्रासर:- पति पत्नी दोनों की विकलांगता प्रतिशत 50 से ऊपर होने बावजूद नही मिला आवास।*
*क्राशर:- मजदूरी कर जीवनयापन करने को मजबूर दिव्यांग परिवार।*
आर पी पी न्यूज़ :: सवांददाता अभय पासवान-*हरपुर:-* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिव्यांगों की सुरक्षा एवं सम्मान के लिए कई सारी योजनाओ की घोषणा तो की गई पर ये घोषणाएं सरकारी फाइलों में दब कर रह गयी जिसका जीवंत उदाहरण के परतावल ब्लॉक के अंतर्गत ग्रामसभा बेलासपुर नर्सरी निवासी दिव्यांग नंदलाल जिसे दिव्यांगों को दिए जाने वाले सरकारी लाभ से अधिकारियों एवं प्रधान की लापरवाही के कारण वंचित रहना पड़ रहा है।वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का ड्रीम गाँव माना जाने वाला गाँव बेलासपुर नर्सरी जो कि मुख्य मंत्री के बेहद करीबी गावों में से एक माना जाता है उसी गाँव के निवासी दिव्यांग नंदलाल एवम सरिता जो कि पति पत्नी है और विकलांगता की प्रतिशतता में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा है इन दिव्यांगों के रहने के लिए घर तक नही है किसी तरह से एक छोटी सी टूटी झोपड़ी में अपने दो माशूम बच्चो आकाश 6वर्ष और किशन 4 वर्ष को लेकर रहने को मजबूर है।
दिव्यांग माँ बाप की मजबूरी और बेबसी मशूमो के भविष्य पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता नजर आ रहा।
कोई भी अधिकारी या जिम्मेदार इन दिव्यांगों के मदद को आगे नही आ रहा
दिव्यांग नंदलाल अपनी जीविका चलाने के लिए मजदूरी करता है पर गाँव वालों द्वारा नंदलाल की कहानी सुनने पर दिल भर जाता है लोगो ने बताया कि नंदलाल को कभी कभी काम के अनुरूप लोग मजदूरी भी नही देते है और कुछ ही पैसे देकर भगा देते है बोलने में असमर्थ नंदलाल बेबस और लाचार होकर वापस अपने घर को आ जाता है ।
इस संबंध में दिव्यांग नंदलाल की पत्नी सरिता से जब पूछा गया तो बेबस सरिता रो रो कर अपनी ब्यथा सुनाने लगी सरिता ठीक से चल भी नही सकती पीड़िता ने बताया कि मेरे पति दो तीन भाई है एक भाई के नाम से जमीन का पट्टा है और दूसरा पट्टा नंदलाल की माँ के नाम से है दोनों भाइयों के पट्टे की जमीन पर आवास मिल चुका है पर नंदलाल को पारिवारिक बंटवारे में अलग कर दिया गया है।असहाय नंदलाल को अकेला कर दिया है जो अपनी सहायता भी नही कर पा रहा है इस संबंध में जब सेक्रेटरी दीप्ति जायसवाल और ग्रामप्रधान से पुछा गया तो इंसानियत और करुणा से कोशो दूर इन अधिकारियों द्वारा जमीन के पट्टे का हवाला देते हुए कहा गया कि जब जमीन का पट्टा होगा तब आवास बनेगा अब सवाल ये उठता है कि आखिर इस लाचार दिव्यांगों का पट्टा दिलाएगा कौन जब जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया ऐसा है तो जो पीड़ित से प्रेम के एक शब्द नही बोल सकते क्या वो असहाय दिव्यांग नंदलाल को पट्टा दिलाने में मदद करेंगे? जिस प्रकार अधिकारी सिस्टम का हवाला देकर अपने कर्तब्य की इतिश्री कर लेते है ऐसे में क्या एक गरीब दिव्यांग को न्याय मिलेगा यह एक बड़ा सवाल है जो वर्तमान सरकार के ग्रामविकास के दावे और दिव्यांगों के सम्मान में किये जाने वाले बड़े बड़े दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है नेताओ द्वारा वादे तो किये जाते है पर इन्हें क्रियान्वयन के क्षेत्र में कोई प्रयास नही किया जाता ।

