आर.पी.पी.न्यूज़
संवाददाता नूर मोहम्मद :
दिनांक 26 दिसम्बर, 2019 को गोरखपुर में आंशिक सूर्यग्रहण की खगोलीय घटना घटित होगी। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला द्वारा संचालित यू0पी0 अम्च्योर एस्ट्रोनामी क्लब के सदस्यों के सहयोग से इस अवसर पर वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला,गोरखपुर में जन सामान्य हेतु एक कार्यक्रम को आयोजन किया जायेगा। इस कार्यक्रम में आंशिक सूर्य ग्रहण सोलर चश्मों एवं टेलीस्कोप के माध्यम से दिखाया जायेगा।
दिनांक 26.12.2019 को प्रातः 8.19 बजे आंशिक सूर्यग्रहण का प्रारम्भ होगा तथा 9.36 बजे आंशिक सूर्यग्रहण अपने अधिकतम पर होगा। इस दौरान सूर्य का लगभग 44.11 प्रतिशत भाग चन्द्रमा द्वारा ढक लिया जायेगा। प्रातः 11.07 बजे आंशिक सूर्यग्रहण समाप्त हो जायेगा। दिनांक 26.12.2019 को सूर्योदय का समय प्रातः 6.52 पर है।
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला,गोरखपुर द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन यू0पी0 अम्च्योर एस्ट्रोनामी क्लब के सदस्यों के सहयोग से नक्षत्रशाला पर किया जायेगा। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला द्वारा वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला पर दो दूरबीनों की स्थापना की जायेगी। इन में से दो दूरबीनों पर प्रोजेक्शन के माध्यम से आंशिक सूर्यग्रहण का अवलोकन कराया जायेगा। दो सौर दूरबीनों पर फिल्टर लगाकर सूर्य ग्रहण दिखाया जायेगा। इसके अतिरिक्त क्लब के सदस्यों द्वारा इस आन्शिक सूर्य ग्रहण की फोटो ग्राफी व विडियों ग्राफी भी की जायेगी। वर्तमान में 13 वर्ष से ऊपर कोई भी व्यक्ति/विद्यार्थी नक्षत्रशाला द्वारा संचालित खगोलकी क्लब का सदस्य बन सकता है।
दिनांक 26.12.2019 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण एक छल्लेदार (वलयाकार) सूर्यग्रहण है जो कि भारतवर्ष के केरल एवं तमिलनाडु राज्यों में देखा जा सकेगा। इन राज्यों के मंगलौर, कासरगोड़, कोझीकोड, तिरूचिरापल्ली, इरोड, पलक्कड़ मदुरई, काराईकुड़ी, करूर स्थानों से छल्लेदार सूर्यग्रहण को देखा जा सकेगा। इसके अतिरिक्त श्रीलंका के मन्नार एवं जाफना स्थानों से भी इस छल्लेदार सूर्य ग्रहण को देखा जा सकेगा। इसके अतिरिक्त सम्पूर्ण भारत वर्ष से आंशिक सूर्य ग्रहण को ही देखा जा पायेगा।
यद्यपि भारतवर्ष में आंशिक रूप से दिखायी देगा परन्तु वास्तव में यह छल्लेदार सूर्यग्रहण है तथा सऊदी अरब, ओमान, दक्षिणी भारत,इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में यह घटना छल्लेदार पूर्ण सूर्यग्रहण के रूप में घटित होगी। एशिया के ज्यादातर हिस्सों में उत्तरी एवं पूर्वी अफ्रीकन देशों में, उत्तरी तथा पश्चिमी आस्ट्रलिया, प्रशांत महासागर एवं हिन्द महासागर में स्थित द्वीपों से यह छल्लेदार सूर्यग्रहण आंशिक सूर्यग्रहण के रूप में देखा जा पायेगा।
दिनांक 21ण्06ण्2020 को पुनः गोरखपुर में आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। इस दौरान सूर्य का लगभग 88 प्रतिशत भाग चन्द्रमा द्वारा ढक लिया जायेगा।इससे पूर्व सूर्य ग्रहण वर्ष 2009 में 94 प्रतिशत गोरखपुर में हुआ था। यहाँ इस आन्शिक सूर्य ग्रहण का आयोजन पूरी तरह से मौसम पर निर्भर होगा।
सूर्यग्रहण के सम्बन्ध में कुछ रोचक तथ्य
ऽ ग्रहण एक खगोलीय घटना हैए जब एक खगोलीय पिंड पर दूसरे पिंड की छाया पड़ती हैए तब ग्रहण होता हैण् यह दो प्रकार का होता हैरू सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहणण् जब चन्द्रमाए पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है तो सूर्य से पृथ्वी पर आने वाला प्रकाश प्रतिबंधित हो जाता है और सूर्य ग्रहण लगता हैण् इसी तरह जब सूर्य और चन्द्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो सूर्य से चन्द्रमा पर पहुँचाने वाला प्रकाश स्रोत पृथ्वी के द्वारा प्रतिबंधित हो जाता है और चन्द्र ग्रहण की स्थिति बन जाती हैण्
ऽ चन्द्रमा के सूर्य एवं पृथ्वी के बीच आने पर सूर्यग्रहण पड़ता है। यद्यपि प्रत्येक माह की अमावस्या को चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है परन्तु प्रत्येक अमावस्या को सूर्यग्रहण नहीं होता। ऐसा चन्द्रमा के परिक्रमा पथ का पृथ्वी के परिक्रमा पथ से 50 झुका होना है।
ऽ चन्द्रमा द्वारा सूर्य के बिम्ब के पूरे या कम भाग के ढ़के जाने की वजह से सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं जिन्हें पूर्ण सूर्य ग्रहणए आंशिक सूर्य ग्रहण व वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं।
व पूर्ण सूर्य ग्रहण
पूर्ण सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफ़ी पास रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है और चन्द्रमा पूरी तरह से पृ्थ्वी को अपने छाया क्षेत्र में ले ले फलस्वरूप सूर्य का प्रकाश पृ्थ्वी तक पहुँच नहीं पाता है और पृ्थ्वी पर अंधकार जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है तब पृथ्वी पर पूरा सूर्य दिखाई नहीं देता। इस प्रकार बनने वाला ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण कहलाता है।
व आंशिक सूर्य ग्रहण
आंशिक सूर्यग्रहण में जब चन्द्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच में इस प्रकार आए कि सूर्य का कुछ ही भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है अर्थात चन्दमा सूर्य के केवल कुछ भाग को ही अपनी छाया में ले पाता है। इससे सूर्य का कुछ भाग ग्रहण ग्रास में तथा कुछ भाग ग्रहण से अप्रभावित रहता है तो पृथ्वी के उस भाग विशेष में लगा ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण कहलाता है।
व वलयाकार सूर्य ग्रहण
वलयाकार सूर्य ग्रहण में जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफ़ी दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात चन्द्र सूर्य को इस प्रकार से ढकता है कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता बल्कि सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है। वलय आकार में बने सूर्यग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहलाता है।
ऽ पूर्ण सूर्यग्रहण में पूर्णतः का समय अधिकतम 7 मिनट 31 सेकेण्ड हो सकता है।
ऽ एक वर्ष में अधिकतम पांच सूर्यग्रहण हो सकते हैं।
ऽ भूूमध्य रेखा पर सूर्यग्रहण की छाया 1770 किलोमीटर प्रति घण्टे की चाल से चलती है तथा धु्रवों पर यह गति 8046 किलोमीटर प्रति घण्टा तक हो सकती है।
ऽ सावधानी! किसी प्रमाणित सोलर फिल्टर के बिना साधारण अवस्था अथवा सूर्य ग्रहण की स्थिति में सूर्य की तरफ सीधे, दूरबीन, चश्मा अथवा बाइनाकुलर इत्यादि से देखने पर आँखे खराब हो सकती हैं।
(महादेव पाण्डेय)
वैज्ञानिक अधिकारी
गोरखपुर।

