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Sunday, 21 October 2018

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कटा हुआ सिर ट्रैक पर और धड़ अस्पताल में, ऐसा मंजर जिसने देखा रूह कांप उठी: देखिये अमृतसर घटना पर विशेष रिपोर्ट आर.पी .पी न्यूज़ पोर्टल पर


अमृतसर ट्रेन हादसा में रोते बिलखते मृतको के परिजन
अमृतसर का ऐसा दृश्य जिस पर मौत भी जार-जार रोई। किसी का सिर रेलवे ट्रैक पर पड़ा था तो धड़ अस्‍पताल लाया जा सका था। पूरा मंजर इतना दर्दनाक की जो भी देखता सिसक कर रो पड़ता। अभी तक शायद वो खौफनाक मंजर देखने वाली आँखों में वो दर्द दिखाई देता होगा जिसने अपने सामने 61 लोगों की ज़िन्दगी को मौत के गले लगते देखा होगा | जलते हुए रावण को देख रहे कई घरों के चिराग बुझ गए हैं। मासूम बच्चों की लाशों को सीने से लगाकर फूट-फूटकर रो रहे लोग उस घड़ी को कोस रहे हैैं जब रावण का दहन देखने जोड़ा फाटक गए थे। प्रशासन पहले तो सोया रहा, अब रात-रात जागकर मृतकों के परिवारों से शोक व घायलों के जिस्म पर संवेदना का मरहम लगाने का अर्थहीन प्रयास कर रहा है। ये नाकामी कब मिटेगी पता नही, घटना में मारे गए लोगों के अंग भंग हो चुके हैं। शवों की क्षत-विक्षत तस्वीरें विचलित करने वाली हैं, इसलिए इन्हें दिखाना संभव नहीं। जरा सोचिए जिन मृतकों की तस्वीरों को हम और आप देख नहीं सकते, उनके परिजनों के दिल पर क्या बीतती होगी। मौत इतनी विकराल रूप लेकर आई, की जो व्यक्ति रावण का किरेदार उस रावण दहन के राम लीला में निभा रहा था उसे भी काल के गाल में ले जाने से नही रुकी | किसी ने अपने परिजनों को खोया तो किसी ने पूरा परिवार को, तो वहीँ दशहरा मेले में 18 वर्षीय मनीष उर्फ आशु भी पहुंचा था। घटना के बाद परिवार वाले उसे तलाशने के लिए रेलवे ट्रैक पर पहुंचे। क्षत-विक्षत लाशों के बीच मनीष नहीं मिला। उसके पिता विपिन कुमार ने बताया कि वह सिविल अस्पताल, गुरु नानक देव अस्पताल व निजी अस्पतालों में भी गए, पर उसके बारे में कुछ पता नहीं चल सका। इसके बाद मनीष की फोटो सोशल मीडिया पर भेजी गई। शनिवार सुबह पता चला कि रेलवे ट्रैक से एक युवक का कटा हुआ सिर बरामद हुआ है। यह सिर मनीष का था। पिता विपिन ने बताया कि मनीष का धड़ गुरु नानक देव अस्पताल में था और सिर रेलवे ट्रैक पर। छोटे भाई रिशु ने बताया कि मनीष 12वीं कक्षा का छात्र था। शाम पांच बजे दशहरा देखने गया था। गरीबी से परेशान जूते बनाकर परिवार का पेट पालने वाले विपिन कुमार के लिए बेटे की मौत का गम बहुत बड़ा है। वह अस्पताल में फूट-फूट कर रोए। साथ ही प्रशासन व सरकार को इस घटना के लिए कसूरवार बताया। कहा, मेेरा सब कुछ लुट गया। पत्नी रेखा को अभी तक नहीं बताया कि उसके जिगर का टुकड़ा उसका लाल अब नहीं रहा। वह तो अभी भी मनीष के आने का इंतजार कर रही है। सोचिये उस माँ पे क्या बीतेगी ? अभागी मां.. जोड़ा फाटक निवासी संदीप का आंचल सूना हो गया है। दुर्घटना में संदीप ने दो मासूम बच्चों के साथ-साथ अपने पिता को भी खो दिया। सिविल अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में दाखिल संदीप शुक्रवार से ही कोमा में है। उसके पति जितेंद्र सिंह ने बताया कि पत्नी संदीप और दो बच्चे तीन वर्षीय नीरज व छह वर्षीय सोनिया तथा सास मनजीत कौर व ससुर अभय दशहरा देखने गए थे। सभी रेलवे ट्रैक पर खड़े थे। अचानक रेल आई और लोग कटने लगे। संदीप ने दोनों बच्चों को धक्का मारकर पटरियों से दूर कर दिया और खुद भी कूद गई। जब कि पूरा प्रयास विफल हुआ उसके सिर पर गहरी चोट लगी और वह मौके पर ही बेहोश हो गई, दोनों बच्चे सोनिया तथा नीरज भीड़ के पैरों तले दबकर मौत की आगोश में समा गए। दोनों बच्‍चाें को सिविल अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद ही उन्हें मृत बता दिया। जिंतेद्र बोले, बच्चों का अंतिम संस्कार करके आया हूं। घटना के वक्त संदीप के पिता अभय ट्रेन से कट गए और उनकी मौके पर मौत हो गई, जबकि संदीप की मां मनजीत कौर भगदड़ में गिरकर जख्मी हो गई।


यह एक ऐसा मंजर था जिस पर मौत भी कई बार  रोई होगी । किसी का सिर रेलवे ट्रैक पर पड़ा था तो धड़  अस्‍पताल। जब पिता को मिला बेटे का सिर तो वह उसके शरीर की तलाश कर रहा था। एक ऐसा हादसा जो देश  भर के लोगों को कुछ पल के लिए मौन कर दिया  |

10 वर्षीय विशाल अपने पापा राजेश के साथ मेला देखने गया था। भगदड़ में पिता का साथ छूट गया। भीड़ में दब गए, शायद इसलिए बच गए। पिता-पुत्र दोनों सिविल अस्पताल में दाखिल हैं। राजेश के अनुसार पटाखों की आवाज के बीच हमें ट्रेन का हॉर्न सुनाई नहीं दिया।
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पोस्टमार्टम हाउस में बिछ गईं लाशें, पोस्‍टमार्टम करने वाले स्‍टाफ भी उस समय हो गए द्रवित
अमृतसर के  सिविल अस्पताल व गुरुनानक देव अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस में चीख पुकार मची रही। एक के बाद एक शव यहां लाए जाते रहे। परिजनों की चीखों ने पोस्टमार्टम हाउस के स्टाफ की आंखें भी नम हो गईं। शवों का पोस्टमार्टम किया गया। सिविल अस्पताल में 37 शवों का पोस्टमार्टम हुआ, जबकि गुरुनानक देव अस्पताल में 17 शवों के पोस्टमार्टम हुए। क्षत-विक्षत शवों का पोस्टमार्टम करने वाला स्टाफ भी इनकी हालत देखकर द्रवित हो उठे।
मारे गए लाेगों में 39 पुरुष, 7 महिलाएं, 10 बच्चे, पांच की पहचान नहीं, 36 का हुआ अंतिम संस्कार 
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