आर.पी.पी न्यूज़:(न्यूज़ डेस्क) प्याज बढ़ती कीमतों के कारण थम नही रहा मध्यम वर्गीय परिवार के आंख में आँसू। फीकी पड़ी मध्यम वर्ग के रसोई का स्वाद। आम आदमी के रसोईघर की पहुंच से दूर हुआ प्याज। सरकारों द्वारा कीमतों पर नियंत्रण करने के लिए कोई सकारात्मक पहल होता दिखाई नही दे रहा है।
गौरतलब है कि भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश है।और जिस तरह कुछ दिनों से देश में प्याज की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है है उससे आम आदमी के जन जीवन पर काफी असर पड़ा है। लोगों के रसोई का स्वाद बिगाड़ गया है। टमाटर, प्याज, लहसुन, गोभी व हरी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं और मध्यम वर्गीय व्यक्तियों के भोजन से दूर हो गया है। आम आदमी के रसोई के खर्चों में इतनी सुरसामई वृद्धि गई है कि जीवन जीने के लिए जो सामान्य भोजन जिसमें चावल दाल रोटी और सब्ज़ी हो को एक साथ अपनी थाली में जुटा पाना आम आदमी के लिए मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी के कुछ नेताओं व मंत्रियों का खुद को शाकाहारी बता कर प्याज और लहसुन की कीमतों की अनदेखी करना तथा दूसरों को भी शाकाहारी बनने की सलाह देना हास्यास्पद और दुखद है।
गौरतलब है कि वही दूसरी तरफ प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज है। क्योंकि इतिहास के कुछ पुराने पन्नों को पलटने पर पता चलता है कि प्याज की बढ़ती कीमतों के कारण विभिन्न पार्टियों सरकारों को चुनाव के दौरान मुंह की खानी पड़ी है। इस लिए सर्दियों के दिनों में भी जगह जगह प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी की गर्मी का असर विरोधी पार्टियों में देखी जा सकती है। कहीं प्याज बांटे जा रहे हैं कोई प्याज की माला पहन कर अपना विरोध जता रहा है और कोई बढ़ती कीमतों को लेकर अनशन पर बैठ गया। ऐसे में वर्तमान केन्द्र व राज्य की सरकारें भी प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर रही हैं। लेकिन अपने तमाम कोशिशों के बाद भी सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने में अब तक कोई ठोस कदम उठा पाने अक्षम साबित हो रही है।
गौरतलब है कि भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश है।और जिस तरह कुछ दिनों से देश में प्याज की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है है उससे आम आदमी के जन जीवन पर काफी असर पड़ा है। लोगों के रसोई का स्वाद बिगाड़ गया है। टमाटर, प्याज, लहसुन, गोभी व हरी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं और मध्यम वर्गीय व्यक्तियों के भोजन से दूर हो गया है। आम आदमी के रसोई के खर्चों में इतनी सुरसामई वृद्धि गई है कि जीवन जीने के लिए जो सामान्य भोजन जिसमें चावल दाल रोटी और सब्ज़ी हो को एक साथ अपनी थाली में जुटा पाना आम आदमी के लिए मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी के कुछ नेताओं व मंत्रियों का खुद को शाकाहारी बता कर प्याज और लहसुन की कीमतों की अनदेखी करना तथा दूसरों को भी शाकाहारी बनने की सलाह देना हास्यास्पद और दुखद है।
गौरतलब है कि वही दूसरी तरफ प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज है। क्योंकि इतिहास के कुछ पुराने पन्नों को पलटने पर पता चलता है कि प्याज की बढ़ती कीमतों के कारण विभिन्न पार्टियों सरकारों को चुनाव के दौरान मुंह की खानी पड़ी है। इस लिए सर्दियों के दिनों में भी जगह जगह प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी की गर्मी का असर विरोधी पार्टियों में देखी जा सकती है। कहीं प्याज बांटे जा रहे हैं कोई प्याज की माला पहन कर अपना विरोध जता रहा है और कोई बढ़ती कीमतों को लेकर अनशन पर बैठ गया। ऐसे में वर्तमान केन्द्र व राज्य की सरकारें भी प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर रही हैं। लेकिन अपने तमाम कोशिशों के बाद भी सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने में अब तक कोई ठोस कदम उठा पाने अक्षम साबित हो रही है।

